नई दिल्ली, जागरण डिजिटल डेस्क। मौसम में आ रहे बदलाव के साथ ही दिल्ली में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति के बावजूद धूल फैलने से रोकने में सफलता नहीं मिल पा रही है, जो चिंताजनक है। धूल फैलने से रोकने के लिए बनाए गए सख्त नियमों को धता बताकर निर्माण कार्य बदस्तूर जारी हैं, जो प्रदूषण के हालात को और भी अधिक गंभीर बना रहे हैं। दिल्ली सरकार के धूल निरोधी अभियान के तहत अब तक 522 निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 165 पर दिशानिर्देशों का उल्लंघन पाया गया और इनपर 53.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। यही नहीं, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने भी धूल फैला रहे 72 बड़े निर्माण कार्यों के मामले में 65 लाख का जुर्माना लगाया है। यह स्थिति दर्शाती है कि धूल नियंत्रण को लेकर सरकारी एजेंसियां तो सक्रिय हैं, लेकिन निर्माण स्थलों पर धूल फैलने से रोकने के नियमों के पालन के प्रति उदासीनता दर्शाई जा रही है।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बुधवार को आइपी एस्टेट स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की बिल्डिंग में कराए जा रहे निर्माण का औचक निरीक्षण किया। यहां भी खुले में रेत पड़ी मिली, जिसके लिए नोटिस जारी किया गया।दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ाने में धूल प्रमुख कारणों में से एक है। यही वजह है कि इसे नियंत्रित करने की दिशा में ठोस प्रयासों की आवश्यकता को देखते हुए धूल निरोधी अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत सरकारी एजेंसियां धूल फैलाने वाले निर्माण कार्यों पर कार्रवाई कर रही हैं।

यह सही है कि सरकारी एजेंसियां धूल नियंत्रित करने को लेकर संजीदा हैं, लेकिन दिल्लीवासियों को भी धूल फैलने से रोकने के प्रयास करने चाहिए। इसके लिए उन्हें स्वयं निर्माण कार्यों में धूल फैलने से रोकने के उपाय करने चाहिए, वहीं यदि कोई अन्य धूल फैला रहा है तो ग्रीन दिल्ली एप पर उसकी तत्काल शिकायत करनी चाहिए, ताकि उसके खिलाफ कार्रवाई हो सके। दिल्लीवासी यदि इसे लेकर गंभीरता दिखाएं तो उनकी मदद से सरकार धूल से होने वाले प्रदूषण को काफी हद तक नियंत्रित कर सकती है।

Edited By: Jp Yadav