ग्रेटर नोएडा [धर्मेंद्र चंदेल]। राजस्थान (Rajasthan) की नदबई सीट से विधायक जोगिंदर अवाना (Jogindra Awana) समेत बहुजन समाज पार्टी (Bahujan samaj party) के छह विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने की पटकथा डेढ़ माह पहले ही लिख गई थी। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (chief Minister Ashok gehlot) के आवास पर एक अगस्त को दिए गए रात्रि भोज में इसकी शुरुआत हुई थी। उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट (Deputy chief Minister) की सहमति के बाद सात सितंबर को इस पर अंतिम मुहर लग गई।

ऐसे लिखी गई विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने की पटकथा

दरअसल, एक अगस्त को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर विधायकों को रात्रिभोज दिया गया। इसमें जोगिंदर अवाना भी परिवार समेत शामिल हुए। वहीं से कांग्रेस में शामिल होने की पटकथा लिखनी शुरू हो गई थी। 21 अगस्त को जयपुर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75 वीं जयंती पर हुए कार्यक्रम में जोगिंदर अवाना अपने समर्थकों समेत पहुंचे। इससे पहले 19 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के राजस्थान से राज्यसभा सदस्य पद के लिए भरे गए नामांकन में जोगिंदर अवाना को प्रस्तावक बनाया गया।

बसपा रही बेखबर, पार्टी राजस्थान में हो गई जीरो

वहीं, सात सितंबर को राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का जन्मदिन था। सचिन पायलट भी गौतमबुद्धनगर के वैदपुरा गांव के रहने वाले थे। जोगिंदर अवाना ने अपने परिवार के साथ सचिन पायलट के घर जाकर जन्मदिन की बधाई थी। वहां कांग्रेस में शामिल होने पर अंतिम मुहर लग गई। बसपा इसको भांप नहीं सकी। इस दौरान बसपा के किसी भी कोर्डिनेटर ने विधायकों से संपर्क नहीं किया। तीन दिन पहले छहों विधायक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिले। सोमवार को छहों विधायकों ने बसपा छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली।

 

बसपा हाईकमान की नीतियों से होने लगा था मोहभंग

दरअसल, राजस्थान के बसपा हाईकमान की नीतियों के चलते जोगिंदर अवाना समेत सभी विधायकों का पार्टी से माेहभंग होने लगा था। निकाय और पंचायत चुनावों में विधायकों की अनदेखी होने लगी थी। जोगिंदर अवाना ने बसपा सुप्रीमों तक अपनी पीड़ा पहुंचाने की कोशिक भी की, लेकिन उनसे मिलने नहीं दिया गया। इससे वे आहत थे।

बसपा मुखिया का हमेशा करेंगे सम्मान : विधायक  जोगिंदर अवाना

दैनिक जागरण से बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि बसपा सुप्रीमों बहन मायावती के आशीर्वाद से वे विधायक बने हैं, इसलिए हमेशा उनका सम्मान किया जाएगा, लेकिन पार्टी में कोर्डिनेटर हावी हो गए हैं। वे पार्टी सुप्रीमों तक कार्यकर्ता की आवाज नहीं पहुंचने देते। जमीनी हकीकत से उन्हें अवगत नहीं कराया जाता। इस वजह से कई फैसले गलत ले लिए जाते हैं। हालांकि, पार्टी छोड़ने से पहले उन्होंने बसपा के उन तमाम कार्यकर्ताओं से माफी भी मांगी, जिनकी वजह से वे विधायक चुने गए थे।

मूलरूप से रूप से नोएडा के झुंडपुरा गांव के रहने वाले जोगिंदर अवाना 2018 में राजस्थान की नदबई विधान सभा सीट से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे, हालांकि उन्होंने नोएडा में कांग्रेस से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। लंबे समय तक वे यूथ कांग्रेस के नोएडा महानगर अध्यक्ष रहे। गौतमबुद्धनगर बसपा सुप्रीमो मायावती का गृह जनपद है। इसके चलते वे बसपा सुप्रीमों के संपर्क में आए।

इससे पहले पिछले साल हुए विस चुनाव के बाद राजस्थान में जोगिंदर अवाना समेत बसपा के छह विधायकों का अशोक गहलोत सरकार को समर्थन था।

दरअसल, राजस्थान में बसपा अशोक गहलोत सरकार को समर्थन कर रही थी। विधान सभा के उप चुनाव, पंचायत व निकाय चुनाव में बसपा ने कांग्रेस के सामने प्रत्याशी उतरने शुरू कर दिए। जोगिंदर अवाना ने कहा कि इस निर्णय ने क्षेत्र का विकास और राजस्थान की तरक्की होगी। सरकार के साथ मिलकर नदबई विधान सभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विकास कार्य कराए जाएंगे।

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Posted By: JP Yadav

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