नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। ससुराल वालों द्वारा पत्नी अंजली को बंधक बनाने को लेकर दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने पति नितिन शर्मा को बड़ी राहत दी है। युवती द्वारा अदालत में पति के पास दिल्ली आने की इच्छा जाहिर करने पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति एजे भंभानी की पीठ ने उत्तर प्रदेश व दिल्ली पुलिस को तत्काल युवती को दिल्ली लाने और याचिकाकर्ता नितिन से मिलाने का निर्देश दिया।

पीठ ने एटा जिले के थाना मिरहची के इंस्पेक्टर सीता राम को निर्देश दिया कि एक महिला सिपाही को अंजली के साथ तैनात किया जाए और दिल्ली के आनंद पर्वत थाने के सिपाही संजय के साथ सुरक्षित दिल्ली लेकर आएं। पीठ ने कहा कि मामले में अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी।

अधिवक्ता एमएल यादव के माध्यम से नितिन ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर पत्नी अंजली को पेश करने का निर्देश देने की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया कि अंजली के स्वजन उसे दिल्ली वापस नहीं आने दे रहे हैं और उसे उनके साथ वैवाहिक घर में रहने से रोक रहे हैं।

नितिन और अंजली ने 10 जून 2021 को रोहिणी स्थिति आर्य समाज मंदिर में शादी की थी और इसके बाद वे आनंद पर्वत इलाके में घर बनाया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि इसके बाद अंजली के स्वजन ने दोनों को अलग कर दिया और अंजली को लेकर एटा के मिरहची लेकर चले गए। मिरहची थाना पुलिस ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से अंजली को अदालत के समक्ष पेश किया।

हाई कोर्ट ने दी 22वें सप्ताह में दी गर्भपात की अनुमति

वहीं, असामान्यताओं से पीडि़त 22 सप्ताह के भ्रूण के जीवित रहने की कम संभावनाओं को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने गर्भपात की अनुमति दी है। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद कहा कि वे असामान्यताओं के कारण गर्भपात के फैसले से सहमत हैं। अदालत ने लेडी हार्डिग अस्पताल में गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति देते हुए कहा कि संबंधित स्त्री रोग विशेषज्ञ यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए। 32 वर्षीय महिला ने याचिका दायर कर कहा कि उसने गर्भावस्था के 22 सप्ताह पूरे कर लिए हैं और जांच में भ्रूण के अंदर असामान्यताओं को देखते हुए इसे गिराने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि भ्रूण के स्वस्थ बच्चे के रूप में पैदा होने की संभावनाएं नगण्य हैं।

मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत गर्भधारण की अवधि 20 सप्ताह से अधिक होने की स्थिति में भ्रूण को गिराने की अनुमति नहीं है। लिहाजा, अदालत विशेष परिस्थिति को देखते हुए गर्भपात की अनुमति दे। इसपर अदालत ने 28 जुलाई को पीठ ने एम्स से मेडिकल बोर्ड गठित कर रिपोर्ट पेश करने को कहा था।

Edited By: Mangal Yadav