नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सहायक कंपनी के पक्ष में आये 4600 करोड़ रुपये के मध्यस्थता फैसले के निष्पादन के संबंध में अपने बैंक खातों का विवरण देना होगा। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की पीठ ने नोट किया कि डीएमआरसी के पास अपने बैंक खातों में 1642.69 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं।

पीठ ने कहा कि यदि दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमईपीएल) निगम के अपने ऋणों को अधिनिर्णय की सीमा तक लेने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करना चाहता है, तो अदालत उसे ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती है।पीठ ने कहा कि डीएमआरसी की संपत्तियों को कुर्क करने की अनुमति नहीं है, लेकिन इसके बैंक खातों के संबंध में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है। पीठ ने डीएमआरसी को दिल्ली या दिल्ली के बाहर बैंक खातों का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। हलफनामे में यह भी उल्लेख किया जाएगा कि किसी विशेष खाते में कितनी राशि पड़ी है।

अदालत के पास यह विकल्प बचा है कि बैंक खाते में कितना पैसा बचा है। इसका ध्यान रखा जा सकता है। पीठ ने आदेश दिया कि डीएमआरसी को दिल्ली या दिल्ली के बाहर बैंक खातों का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जाता है। डीएएमईपीएल के वकील ने डीएमआरसी के हलफनामे पर भरोसा करते हुए कहा कि निगम के पास 17 दिसंबर को उसके बैंक खातों में 5800 करोड़ रुपये से अधिक है।पिछली सुनवाई पर डीएमआरसी ने पीठ को बताया था कि वह डीएएमईपीएल के पक्ष में आए 4,600 करोड़ रुपये के मध्यस्थता फैसले में अगले 48 घंटों में एक एस्क्रो खाते में एक हजार करोड़ रुपये जमा करेगी।

डीएमआरसी ने यह भी कहा था कि वह डीएएमईपीएल को देय 4,600 करोड़ रुपये के भुगतान के एवज में उस पर बकाया कर्ज का भार उठाने के लिए भी तैयार है।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari