नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। सैन्य भूमि पर संचालित हो रही निजी खेल संस्था इक्वेस्टेरियन फेडरेशन आफ इंडिया (ईएफआइ) को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने सवाल उठाया है। राजस्थान इक्वेस्टेरियन एसोसिएशन की एक याचिका पर दाखिल किए गए ताजा आवेदन पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने केंद्र सरकार व ईएफआइ से पूछा कि सैन्य भूमि पर निजी संस्था का संचालन कैसे हो रहा है और यह कैसे संभव है। पीठ ने इसके साथ ही निर्देश दिया कि जिम्मेदार सैन्य अधिकारी अदालत में पेश होकर इस पर रुख स्पष्ट करे।

पीठ ने उक्त टिप्पणी तब की जब एसोसिएशन की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता आशीष कोठारी ने आवेदन दाखिल करके कहा कि इएफआइ खेल संहिता के नियमों का उल्लंघन कर रही है और सेना इसे नियंत्रित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि इएफआइ एक निजी संस्था है, लेकिन इसका संचालन सेना की भूमि पर हो रहा है। उन्होंने दलील दी कि इएफआइ का कार्यालय कैंटोनमेंट क्षेत्र में ही है और इस पर पूरी तरह से सेना का नियंत्रण है, जबकि सेना के पास खेल संस्था को संचालित करने का अधिकार नहीं है।

क्या है पूरा मामला

राजस्थान एक्वेस्टेरियन एसोसिएशन ने अधिवक्ता आशीष कोठारी के माध्यम से दायर इएफआइ को खेल संहिता के नियमों का पालन करने के निर्देश देने की मांग की है। एसोसिएशन ने याचिका में कहा है कि इएफआइ खेल संहिता का पालन करने के लिए बाध्य है। हालांकि, वर्तमान में इसे पूरी तरह से सेना द्वारा संचालित किया जा रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सेना इएफआइ को लोकतांत्रिक व पारदर्शी तरीके से संचालित करने में पूरी तरह से असफल है।

यह तथ्य इस बात से स्पष्ट होता है कि इसके कुल 11 अधिकारियों में से नौ अधिकारी भारतीय सेना के हैं। इतना ही नहीं इसके तहत बनाए गए कुल सदस्यों में अधिकांश सेना के अधिकारी है। उन्होंने दावा कि उनके पास मौजूद आंकड़े के तहत अप्रैल 2018 तक कुल 702 आजीवन सदस्य में से 580 सेना के अधिकारी हैं, जबकि अन्य 151 सदस्य सेना के श्वान यूनिट, वेटनरी हास्पिटल, स्टड फार्म औ सप्लाई डिविजन से जुड़े हैं।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari