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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 29, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कंफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स ने केंद्र सरकार से कहा किसानों पर करम, व्यापारियों पर सितम क्यों?

By Vinay Kumar TiwariEdited By:
Published: Mon, 29 Nov 2021 05:03 PM (IST)

खंडेलवाल ने कहा कि यह किसी से छुपा नही है कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषन का स्तर ...और पढ़ें

प्रदूषण के मामले में व्यापारियों पर मुकदमें और जुर्माने भी माफ हो: प्रवीन खंडेलवाल।
प्रदूषण के मामले में व्यापारियों पर मुकदमें और जुर्माने भी माफ हो: प्रवीन खंडेलवाल।

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। पराली जलाने वाले किसानों को माफी दिए जाने की केंद्र की घोषणा पर कंफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आपत्ति जताई है। साथ ही कटाक्ष किया है कि किसानों पर करम, व्यापारियों पर सितम क्यों। प्रदूषण फैलाने के मामले में किसानों को माफी दी जा रही है, जबकि इसके नाम पर अस्पताल, रेस्तरां, छोटी फैक्टरियों, लघु उद्योग और छोटे कामगारों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। व्यावासिक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि इस निर्णय से भीड़तंत्र के आगे लोकतंत्र ने घुटने टेकने का संदेश जा रहा है। ये व्यापारियों के साथ अन्याय है और देश के संविधान में आजीविका के समान अधिकारों के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि फौरी तौर पर किए गए इंतजामों से प्रदूषण कभी कम नहीं होगा। इसे कम करने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाई जाए और उससे पहले प्रदूषण फैलाने वाले सभी कार्यों का अध्ययन हो और वैकल्पिक व्यवस्था का इंतजाम भी राष्ट्रीय नीति में शामिल होना चाहिए।

खंडेलवाल ने कहा कि यह किसी से छुपा नही है कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषन का स्तर हर दिन बढ़ता जा रहा है। दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स औसतन 390 और 400 के पार पहुंच गया है और इसके लिए वे किसान भी जिम्मेदार है जिन्होंने लाख मिन्नतों के बाद भी पराली जलाना जारी रखा है। ऐसे में सख्त कार्यवाई करने की जगह उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों और जुर्माने को वापस लेना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।