नई दिल्ली, पीटीआइ। दिल्‍ली में बारिश और तेज हवाओं के कारण प्रदूषण का स्‍तर कम हुआ है। लेकिन दिल्‍ली में नंवबर के महीने में बने गैस चैंबर जैसे हालात शायद ही कोई अभी भूला होगा। अगले साल दिल्‍लीवासियों की इस स्थिति से न गुजरना पड़े इसके लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसी दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने वायु और जल प्रदूषण को रोकने के लिए विभिन्न निर्देश जारी करने के साथ ही दिल्ली में कनॉट प्लेस और आनंद विहार में 'स्मॉग टावर' लगाने की प्रायोगिक परियोजना के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार को तीन महीने का समय दिया है।

बता दें कि स्मॉग टावर वायु प्रदूषण घटाने के लिए लगाया जाता है। इसमें हवा साफ करने के लिए कई तहों में फिल्टर लगे होते हैं। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार सात दिन के भीतर प्रायोगिक टावर लगाने के लिए 30 गुणा 30 मीटर जगह मुहैया कराए। परियोजना के लिए खर्च केंद्र सरकार देगी, हालांकि पर्यावरण और वन मंत्रालय को परियोजना की निगरानी करने का निर्देश दिया जाता है। तीन महीने के भीतर परियोजना को पूरा करें।

दिल्ली में आपूर्ति किए जा रहे पानी की गुणवत्ता के संबंध में संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के साथ ही दिल्ली में विभिन्न नमूनों की औचक जांच के बाद भारतीय मानक ब्यूरो को भी एक महीने में रिपोर्ट देने को कहा है। प्लास्टिक, औद्योगिक और अन्य अपशिष्ट के कारण होने वाले प्रदूषण पर चिंता प्रकट करते हुए शीर्ष अदालत ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान की सरकारों को सुनिश्चित करने को कहा है कि अपशिष्ट नहीं जलाए जाएं। समय से अपशिष्ट हटाकर इसका निस्तारण करना चाहिए। राज्यों को छह हफ्ते के भीतर रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।

Posted By: Tilak Raj

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