नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। लाजपत नगर थाना पुलिस ने दिल्ली से वाहन चोरी कर पूर्वोत्तर राज्यों में सप्लाई करने वाले बदमाश को गिरफ्तार किया है। आरोपित से पुलिस टीम ने दो कार बरामद की है। आरोपित की पहचान आमिर के रूप में हुई है। आरोपित केवल एसयूवी कार ही चोरी करता था। जानकारी के अनुसार, 21 अक्टूबर को जोबनमीत सिंह की फाच्यूनर कार उनके लाजपत नगर स्थित घर के बाहर से चोरी हो गई थी। पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस के जरिये जानकारी जुटाई कि कार उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर इलाके में है।

सूचना के आधार पर मौके पर पहुंची पुलिस ने दो दिन तक इंतजार किया और दो दिन बाद गाड़ी लेने आए आमिर को मौके से गिरफ्तार कर लिया। आरोपित की निशानदेही पर साकेत इलाके से चोरी की गई कार भी बरामद की गई है। आरोपित ने बताया कि वह गाडि़यों को सिलीगुड़ी बंगाल के रहने वाले मोती नाम के युवक को बेच देता था। आरोपित ने कहा कि उसका गिरोह केवल एसयूवी गाडि़यों को ही निशाना बनाता है, क्योंकि एसयूवी गाड़ी की मांग अधिक रहती है और कीमत भी अच्छी मिलती है।

उधर बाहरी दिल्ली के शालीमार बाग के मैक्स अस्पताल में सोमवार को एक मरीज के तीमारदारों ने प्रर्दशन किया। उनका आरोप था कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर अधिक रुपये ले लिए। प्रदर्शन के चलते अस्पताल ने मरीज को 84 हजार रुपये लौटाए। नरेला के रहने वाले 38 साल के सुनील कुमार को 20 अक्टूबर को इलाज के लिए मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआत में इलाज के लिए करीब चालीस हजार रुपये खर्च होने की बात कही गई लेकिन परिवार को बिना बताए सुशील कुमार को स्टंट लगाया गया।

आखिर में आपरेशन के लिए एक लाख 90 हजार रुपये का पैकेज बताया गया। बाद में उन्हें दो लाख 74 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया। इसके विरोध में सोमवार को अस्पताल के बाहर मरीज व उनके स्वजन ने जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए लिए शालीमार बाग थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। प्रदर्शन में रेहड़ी पटरी एसोसिएशन और श्री भगत सिंह यूथ ब्रिगेड संस्था के लोग मौजूद रहे।

यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीप खत्री ने बताया कि अस्पताल पर पहले भी इस तरह के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में इस बार सामाजिक दबाव और प्रदर्शन के बाद अस्पताल ने शाम छह बजे मरीज के स्वजन को 84 हजार रुपये का चेक दिया है। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जरूरत से अधिक रुपये लेने का आरोप गलत है। अनुकंपा के आधार पर मरीज को रुपये लौटाए गए हैं।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari