नई दिल्ली [संजीव कुमार मिश्र]। कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनजर गत वर्ष मार्च महीने में भारत में लॉकडाउन लगाया गया था। घर की चारदीवारी में रहते हुए इंटरनेट मीडिया भावनाओं की अभिव्यक्ति का माध्यम बना था। डीयू के गणित विभाग और डॉ भीमराव अंबेडकर कालेज के सोशल वर्क विभाग के शोधकर्ताओं ने ट्विटर पर किए गए ट्वीट का विश्लेषण किया है। शोधकर्ताओं ने गुस्सा, डर, खुशी और गम वाले ट्वीट को अलग अलग वर्गीकृत किया।

उन्होंने अपने शोध में पाया कि भारतीयों के मुकाबले अमेरिकी कोरोना संक्रमण से ज्यादा डरे और सहमे थे। डॉ भीमराव अंबेडकर कालेज के सोशल वर्क विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ विष्णु मोहन दास ने बताया कि गत वर्ष मार्च एवं अप्रैल महीने के एक-एक हफ्ते के दौरान किए गए नौ लाख से अधिक ट्वीट का विश्लेषण किया गया। यह शोध हाल ही में इंटरनेशनल जर्नल आफ रिसेंट एडवांस इन साइकोलाजी एंड साइकोथेरपी में प्रकाशित हुआ है।

इन हैशटैग से किए गए सर्वाधिक ट्वीट

कोरोना वायरस, कोरोना वायरस पैनेडेमिक, शारीरिक दूरी, लाकडाउन, स्टे होम, कोविड, क्वारंटीन, चीन, वायरस, कोविड आदि।

दिल्ली में कोरोना की संक्रमण दर 12 दिनों से आधे फीसद से कम

गौरतलब है कि दिल्ली में लगातार 19 दिनों से कोरोना की संक्रमण दर एक फीसद से कम बनी हुई है। इस दौरान पिछले 12 दिनों से संक्रमण दर आधे फीसद (0.50 फीसद) से कम रही है। इससे कोरोना नियंत्रित है। फिर भी शुक्रवार को 165 नए मामले आए। वहीं 260 मरीज ठीक हुए। इससे सक्रिय मरीजों की संख्या घटकर ढ़ाई हजार से कम हो गई है और मरीजों के ठीक होने की दर 98 फीसद से अधिक हो गई है लेकिन 24 घंटे में 14 मरीजों की मौत हो गई। इस वजह से दूसरी लहर में मृतकों की कुल संख्या 13,995 पहुंच गई है। दिल्ली में 22 अप्रैल को कोरोना की संक्रमण दर 36.24 फीसद हो गई थी। मई के पहले सप्ताह से धीरे-धीरे संक्रमण कम होना शुरू हुआ और 31 मई को संक्रमण दर घटकर 0.99 फीसद हो गई थी। सात जून को संक्रमण दर घटकर 0.36 फीसद हो गई थी। तब से संक्रमण दर 0.50 फीसद से कम बनी हुई है। अभी संक्रमण दर 0.22 फीसद है। इस वजह से 76 हजार से अधिक सैंपल की जांच होने के बावजूद लगातार दूसरे दिन 200 से भी कम नए मामले आए।

अस्पतालों में अब डेढ़ हजार से भी कम मरीज भर्ती

सक्रिय मरीजों की संख्या घटकर 2445 रह गई है। इस वजह से अस्पतालों में अब डेढ़ हजार से भी कम मरीज भर्ती हैं। लिहाजा अस्पतालों में अब बेड खाली पड़े हैं।