यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 26, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
DU में 22 भारतीय भाषाओं की पढ़ाई कर पाएंगे छात्र, स्नातकोत्तर में अगले दो वर्षों में लागू होगी नई शिक्षा नीति
दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र नई शिक्षा नीति के तहत 22 भारतीय भाषाओं का अध्ययन क्षमता संवर्धन के तहत पढ़ पाएंगे। ...और पढ़ें

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र नई शिक्षा नीति के तहत 22 भारतीय भाषाओं का अध्ययन क्षमता संवर्धन के तहत पढ़ पाएंगे। इसको छात्रों को पढ़ाने के लिए पांच क्लस्टर बनाए गए हैं। इनकी कक्षाएं किसी एक कालेज में लगाई जाएंगी। छात्र अपने आनर्स या बीटेक और दूसरे प्रोग्राम के साथ माइनर सब्जेक्ट के तहत भी इनका अध्ययन कर पाएंगे। नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत छात्रों की क्षमता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इस क्लस्टर में अंगेेजी भाषा शामिल नहीं होगी। उसे हटा दिया गया है।
डीयू में एनईपी के तीन वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हुई एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा, फिजिक्स के छात्र अगर संस्कृत पढ़ेंगे तो वे भारतीय भाषाओं में छुपे विज्ञान के कई रहस्यों से पर्दा उठा पाएंगे। जेनरिक इलेक्टिव कोर्स के तहत इनको पढ़ाया जा रहा है।
डिपार्टमेंट ऑफ मॉर्डन इंडियन लैंग्वेज में नए शिक्षक नियुक्त किए गए हैं। अगर जरूरत पड़ी तो दूसरे विश्वविद्यालयों से सहायता लेकर ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी। उन्होंने कहा, 2020 में नई शिक्षा नीति लागू की गई। डीयू ने सबसे पहले इसे लागू किया। उन्होंने कहा, शैक्षणिक सत्र 2022-23 से अंडर ग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क 2022 (यूजीसीएफ) के माध्यम से इसे लागू किया है। इसमें अनुसंधान और नवाचार पर जोर देने के साथ-साथ समग्र और कौशल शिक्षा प्रदान की जा रही है। इसका उद्देश्य विश्लेषणात्मक और रचनात्मक सोच विकसित करना है।
कुलपति ने कहा कि एनईपी के फार्मेट और नियमितीकरण पर बहुत काम हो गया है, अब इसका दूसरा चरण शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा, विश्वविद्यालय ने 25 विदेशी शैक्षणिक संस्थानों के साथ एमओयू साइन किए हैं। इनके जरिये शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। आगे चलकर संयुक्त शैक्षणिक प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा, 29 जुलाई को भारत सरकार प्रगति मैदान में एनईपी पर प्रदर्शनी लगा रही है। इसमें डीयू का भी स्टाल होगा। उन्होंने कहा, डीयू को सुबह आठ से रात आठ बजे खोलने का मकसद छात्रों को अधिक से अधिक संसाधन पढ़ाई के लिए उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा, ज्वाइंट डिग्री प्रोग्राम भी शुरू किए जाएंगे। इसके तहत दूसरे विश्वविद्यालयों के छात्र यहां आकर और यहां से छात्र दूसरे विश्वविद्यालयों में जाकर पढ़ सकेंगे। उनके अंकों के आकलन में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इस मौके पर डीयू दक्षिणी दिल्ली परिसर के निदेशक प्रो. श्री प्रकाश सिंह, रजिस्ट्रार डा. विकास गुप्ता, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. के. रत्नाबली और पीआरओ अनूप लाठर आदि मौजूद रहे।
675 बहु विषयक और कौशल शिक्षा के 109 पाठ्यक्रम
डीयू की डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. के. रत्नाबली ने ने बताया कि डीयू ने स्नातक स्तर के विद्यार्थियों को केंद्र में रख कर एनईपी 2020 का कार्यान्वयन शुरू किया है। इसी के अनुसार विश्वविद्यालय ने यूजीसीएफ़ 2022 तैयार किया है। इसमें 675 बहुविषयक पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं।
समग्र शिक्षा के तहत कौशल शिक्षा के 109 पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं। कौशल शिक्षा के विषयों का उद्देश्य छात्रों को स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रेरित करना है। अनुसंधान और नवाचार को ध्यान में रखते हुए डीयू ने उदमोद्य फाउंडेशन की स्थापना की है। स्नातक स्तर पर शोध को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। जिन छात्रों ने बीच में पढ़ाई छोड़ दी वे बाद में आकर इसे पूरा कर सकते हैं। उन्हें प्रवेश परीक्षा नहीं देनी होगी।
मणिपुर के छात्रों की मदद की जाएगी
कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा, मणिपुर की दिक्कत को पूरा देश समझता है। दिल्ली विश्वविद्यालय ऐसे सभी पीड़ित विद्यार्थियों के लिए हर संभव मदद के लिए तैयार है। यदि किसी विद्यार्थी को कोई दिक्कत है तो वह डीयू प्रशासन से संपर्क कर सकता है। उनके लिए अलग से प्रवेश की व्यवस्था की जाएगी।
मेरिट और उम्र के आधार पर होगा सीईएस में प्रवेश
कुलपति ने बताया कि डीयू की अनूठी योजना, काम्पिटेंस एन्हांशमेंट स्कीम, के लिए भी पंजीकरण शुरू हो चुके हैं। 50 से अधिक पंजीकरण हुए हैं। किसी भी उम्र के लोग इसमें प्रवेश ले सकते हैं। यह सर्टिफिकेट कोर्स है। इसमें अधिकतम दो कोर्स चुने जा सकते हैं।
60 वर्ष से कम उम्र वाले आवेदकों को कोर्स की अनिवार्य योग्यता के आधार पर प्रवेश दिया जा रहा है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रवेश मेरिट और उम्र के आधार पर होगा, जहां योग्यता और उम्र को क्रमशः 70 और 30 प्रतिशत का महत्व दिया जाएगा। पाठ्यक्रम में सीटों की संख्या उस पाठ्यक्रम की कक्षा की कुल क्षमता का अधिकतम 10 प्रतिशत या 6 सीटें, जो भी कम हो, होगी। उन्होने बताया कि किसी पाठ्यक्रम में सीईएस के तहत इन सीटों को अतिरिक्त माना जाएगा।
दो वर्षों में स्नातकोत्तर में लागू हो जाएगी नई शिक्षा नीति
दिल्ली विश्वविद्यालय दो वर्षों में स्नातकोत्तर में भी नई शिक्षा नीति को लागू कर देगा। फिलहाल यह स्नातक स्तर पर ही लागू है। कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा, अभी पहला बैच पढ़कर आ रहा है। उनकी पढ़ाई पूरी होने के बाद स्नातकोत्तर में एनईपी की शुरुआत कर दी जाएगी। दो वर्ष इसमें लगेंगे। उन्होंने कहा, स्नातकोत्तर के पाठ्यक्रम को नई शिक्षा नीति के अनुसार बदला जा रहा है। नवीन सत्रों में छात्रों को इसका लाभ मिलेगा। बता दें कि डीयू में 58 विभागों में 77 स्नातकोत्तर प्रोग्राम संचालित किए जा रहे हैं।
