नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। पिछले एक साल के दौरान दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण में कुछ राहत रही है, लेकिन इतनी भी नहीं जिससे पूरी तरह संतुष्ट हुआ जा सके। दरअसल, 2020 और 2021 में लॉकडाउन के दौरान ज्यादातर शहरों में वायु प्रदूषण कम हो गया था, लेकिन दिल्ली और लखनऊ में यह सामान्य से अधिक ही रहा। गैर सरकारी संस्था क्लाइमेट ट्रेंड्स के शोधकर्ताओं ने 2019 से 2021 के मार्च, अप्रैल और मई के आंकड़ों का अध्ययन किया है।

गैर सरकारी संस्थान के इस अध्ययन में दिल्ली, लखनऊ, मुंबई और कोलकाता के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के वायु गुणवत्ता के आंकड़ों की तुलना की गई। आंकड़ों में 2020 और 2021 के लाकडाउन व अनलाक के दौर को शामिल किया गया।

अध्ययन से पता चला है कि मुंबई को छोड़कर, बाकी शहरों में 2020 में इन तीन महीनों के दौरान पीएम 2.5 के औसत स्तर में गिरावट देखी गई।

डॉ. जीसी किस्कू (मुख्य विज्ञानी पर्यावरण, टाक्सिकोलाजी,सीएसआइआर) का इस बारे में कहना है कि सीपीसीबी की तरफ से निर्धारित पीएम 2.5 (2.5 माइक्रोन से कम माप वाला पार्टिकुलेट मैटर) की सुरक्षित सीमा 40 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर है।कोट2020 में लाकडाउन के दौरान निर्माण और औद्योगिक गतिविधि और वाहन बंद रहे। हालांकि, 2021 का लाकडाउन उतना कठोर नहीं था, लेकिन औसत प्रदूषण में गिरावट हुई है।

दिल्ली के साथ इससे सटे शहरों और आसपास के इस पूरे क्षेत्र में प्रदूषण की पांच प्रमुख वजह हैं। ऐसे में इन पर रोक लगाना जरूरी है।

  • उद्योगों से निकलने वाला धुआं
  • कचरा जलाने से निकलने वाला धुआं
  • निर्माण व ध्वस्तीकरण गतिविधियों से उठने वाली धूल
  • बिजली संयंत्रों से निकलने वाला धुआं शामिल है।
  • सर्दियों में इस पूरे क्षेत्र को पराली का धुआं भी अपनी जकड़ में ले लेता है।
  • वाहनों से निकलने वाला धुआं।

बता दें कि दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण में सबसे ज्यादा योगदान गाड़ियों से निकलने वाले धुएं को बताया जाता है। ऐसे में दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी सरकार अब इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने में लगी है।

Edited By: Jp Yadav