नई दिल्ली [शुजाउद्दीन]। अनलॉक-2 में भी दिल्ली का एकमात्र गाजीपुर में बना बूचड़खाना लॉक है। भले ही बूचड़खाने पर ताला जड़ा हो, लेकिन मीट की दुकानों पर धड़ल्ले से निगम की नाक के नीचे पशुओं की कटाई हो रही है। मीट के दुकानदार दोगुने दाम वसूल रहे हैं। इस कोरोनाकाल में दिल्ली में भैंस का मीट 300 से 350 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है, जबकि आम दिनों में इसके दाम 180 रुपये थे। आम दिनों में जो बकरे का मीट 300 से 400 रुपये किलो था, वह अब 550 से 700 रुपये किलो बेचा जा रहा है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है, ऐसा नहीं है कि इन चीजों से नेता से लेकर अधिकारी वाकिफ नहीं है। इसके बाद भी वह कुछ नहीं कर रहे हैं। पहले ही जनता महंगाई की मार झेल रही थी। रेट बढ़ाने के पीछे मीट दुकानदार तर्क दे रहे हैं कि बूचड़खाना बंद है, चोरी-छिपे दुकानों पर पशु काटे जा रहे हैं।

बूचड़खाने के अलावा कहीं पशु नहीं काटे जा सकते। दुकानों पर आराम से मीट बेच सके, इसलिए सरकारी अधिकारियों को ज्यादा पैसे खिलाने पड़ रहे हैं। इसलिए रेट बढ़ा दिए गए हैं। सवाल यह भी है कि जब बूचड़खाना बंद है तो दुकानों पर मीट कैसे बिक रहा है, निगम को अगर पता है कि मीट ज्यादा रेट पर बिक रहा है तो वह बूखड़खाने को क्यों नहीं खोल पा रहा। बूचड़खाना बंद होने से भले ही निगम को घाटा हो रहा हो, लेकिन अधिकारियों व नेताओं की चांदी हो रही है।

दिल्ली मीट मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अरशद हबीब कुरैशी ने बताया कि कोरोना की वजह से मार्च में देशभर में लॉकडाउन हुआ था, तभी से बूचड़खाना बंद है। इससे जुड़े हुए 300 हजार से ज्यादा लोग अपने घर पर बैठे हुए हैं। बूचड़खाना बंद होने से निगम को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। लाइव स्टॉक मार्केट भी बंद है बूचड़खाने के पास ही लाइव स्टॉक मार्केट बनी हुई है। जहां भैंस, बकरे व आदि पशु बिकते हैं। लॉकडाउन के शुरुआती दिन से ही यह मार्केट भी बंद है। इस मार्केट से करीब 300 लोग जुड़े हुए हैं। पंजाब, हरियाणा, उत्तर-प्रदेश, राजस्थान से पशु इस मार्केट में आते हैं। मीट कारोबारी स्टॉक मार्केट से पशु खरीदकर, पास के बूचड़खाने में कटवाते हैं। उसके बाद वह मीट दुकानों व होटल में भेजा जाता है।

बूचड़खाना अलाना नाम की कंपनी चलाती है, कंपनी इसे चला नहीं पा रही है। बूचड़खाना खुलवाने के लिए मीट कारोबारी दिल्ली के उपराज्यपाल बैजल, महापौर निर्मल जैन समेत कई अधिकारियों व नेताओं से मिल चुके हैं। लेकिन बूचड़खाना शुरू नहीं हो पा रहा है। -इरशाद बाबू कुरैशी, महासचिव, दिल्ली मीट मर्चेंट एसोसिएशन।

गाजीपुर बूचड़खाने का ठेका दस वर्षों के लिए अलाना कंपनी को दिया गया था। इसी वर्ष फरवरी में कंपनी का टेंडर छह महीने के लिए बढ़ाया गया था, सोमवार या मंगलवार से बूचड़खाने में काम शुरू हो जाएगा।- निर्मल जैन, महापौर, पूर्वी दिल्ली नगर निगम।

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