नई दिल्ली, जेएनएन। परियोजनाओं पर यदि समय से अमल न हो तो उसका क्या असर होता है, इसका ताजा उदाहरण नई दिल्ली रेलवे व मेट्रो स्टेशन के बीच प्रस्तावित स्काई वॉक की योजना है। एक साल में ही इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब तीन गुना बढ़ चुकी है। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने नए सिरे से इसके निर्माण की प्रक्रिया शुरू की है। अब यह स्काई वॉक करीब 25 करोड़ की लागत से बनेगा। हालांकि, इस योजना में कई अतिरिक्त सुविधाएं जोड़ी गई हैं। डीएमआरसी का दावा है कि यह दिल्ली का सबसे अत्याधुनिक स्काई वॉक होगा।

डीएमआरसी ने पिछले साल जून में इसके निर्माण के लिए टेंडर जारी किया था। तब इसकी निर्माण लागत करीब नौ करोड़ आंकी गई थी, लेकिन यह काम शुरू नहीं हो सका। स्काई वॉक का डिजाइन तैयार है, इसलिए डीएमआरसी ने दोबारा प्रक्रिया शुरू की है। यह स्काई वॉक अजमेरी गेट की तरफ रेलवे स्टेशन के भवन से सटे फुट ओवरब्रिज संख्या दो से एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन मेट्रो स्टेशन के प्रवेश द्वार तक बनेगा। इसकी लंबाई करीब 210 मीटर होगी। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद नौ माह में यह बनकर तैयार होगा।

स्काई वॉक में होंगे चार द्वार

यह स्काई वॉक चार जगह से जुड़ा होगा। इन चारों प्वाइंट पर प्रवेश व निकास द्वार होगा, जहां यात्रियों के लिए एस्केलेटर भी होंगे। पहला प्रवेश व निकास द्वारा प्रीपेड ऑटो, टैक्सी बूथ के नजदीक, दूसरा यलो लाइन पर स्थित नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन के निकास द्वार के नजदीक, तीसरा एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के मेट्रो स्टेशन के पास व चौथा मल्टीलेवल पार्किंग के पास होगा।

भीड़ से बचेंगे यात्री

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन करीब पांच लाख लोगों की आवाजाही होती है। स्टेशन के बाहर भीड़ के कारण यात्रियों को मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने में परेशानी होती है। स्काई वॉक बनने के बाद रेलवे स्टेशन व मेट्रो स्टेशन के बीच आवागमन में यात्रियों को सुविधा रहेगी।

यह होगी खासियत

डीएमआरसी का कहना है कि इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री में बदलाव किया गया है। स्काई वॉक की छत में जिंक, एल्युमिनियम, टाइटेनियम जैसी धातुओं का इस्तेमाल किया जाएगा। हर प्रवेश व निकास द्वारा पर स्टील के गेट लगेंगे। स्काई वॉक के दोनों ओर लेमिनेट शीशे की रेलिंग व एल्युमीनियम के पैनल लगे होंगे। इसके अलावा उसके निर्माण में रेड आगरा स्टोन का इस्तेमाल किया जाएगा।

ऑटोमैटिक लाइट से होगा जगमग

स्काई वॉक पर ऑटोमैटिक लाइट की सुविधा होगी, जिससे जरूरत के मुताबिक रोशनी मिल सकेगी। अंधेरा होते ही स्काई वॉक स्वत: रोशनी से जगमग हो जाएगा। यहां किसी को भी लाइटें जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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Posted By: Mangal Yadav

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