नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। सिंगल यूज प्लास्टिक (एसयूपी) पर देशव्यापी प्रतिबंध राष्ट्रीय राजधानी में ही लागू नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि प्रतिबंध लागू होने के चौथे दिन भी बाजारों में इसका धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। सर्वाधिक उपयोग छोटे दुकानदार से लेकर रेहड़ी-पटरी वाले धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं। न तो उनमें प्रशासन का खौफ है और न ही जुर्माने का।

सिंगल यूज प्लास्टिक विक्रेता मौके पर ही जाकर दुकानदारों को यह पालीथिन से लेकर स्ट्रा, गिलास आदि वस्तुओं पर रोक है मगर उसके बावजूद धड़ल्ले से हो रहा है सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग। मार्केट एसोसिएशन ने कहा कि सख्ती करें प्रशासन तो मिले छुटकारा यूज प्लास्टिक का उपयोग।

मार्केट एसोसिएशन ने कहा कि सख्ती करें प्रशासन तो मिले छुटकारा यूज प्लास्टिक का उपयोग

मार्केट एसोसिएशन ने कहा कि सख्ती करें प्रशासन तो मिले छुटकारा यूज प्लास्टिक के दायरे में आने वाली वस्तुओं को उपलब्ध करा रहे हैं। बाजारों में लोगों यह तो पता है कि सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंधित है, लेकिन विकल्पों के अभाव में मजबूरी में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, दुकानदार भी विक्लपों को देने में अधिक खर्च आने से लोगों को विकल्प देने से बच रहे हैं, क्योंकि दूसरे दुकानदार उनको पालीथिन दे रहे हैं ऐसे में वह 15-20 रुपये अतिरिक्त थैले के रूप में खर्च नहीं कर रहे हैं। इसी को लेकर सोमवार को दैनिक जागरण की टीम ने विभिन्न बाजारों में सिंगल यूज प्लास्टिक पर लगे प्रतिबंध की पड़ताल की। पेश हैं रिपोर्ट..

स्थान- चांदनी चौक, समय: दोपहर एक बजे

कुछ लोग बाजार में कपड़े व कागज का थैला लेकर आ पहुंच रहे थे, तो कई लोग पालीथिन का इस्तेमाल करते दिखे। बाजार में बड़े दुकानदार तो खरीदारों को कपड़े व कागज का बैग दे रहे हैं, लेकिन छोटे दुकानदार एसयूपी नियमों का उल्लंघन करते दिखे। वह चोरी-छिपे ग्राहकों को पालीथिन देते नजर आए। हालांकि, कई दुकानदारों के साथ बाजार में आने वाले खरीदारों को एसयूपी प्रतिबंद होने की जानकारी तक नहीं है। जिससे लोग बेखौफ इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

बाजार में खरीदारी करने आए उदय ने कहा कि उन्हें इसको लेकर पहले से जानकारी थी। यह एक अच्छी पहल है। इसमें युवाओं की भागीदारी को बढ़ाना चाहिए। लोगों को भी जागरूक होकर प्रशासन का साथ देना जरूरी है। वहीं, बाजार में पालीथिन में सामान लेकर जा रहे अंकित ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। वह कहते हैं कि जरूरी काम था तो बाजार से सामान लेकर जाना था।

नीरज, दुकानदार, कटरा नील का कहना है कि मेन रोड के दुकानदारों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। अधिकतर दुकानों में पालीथिन बंद हो गई है। इसको लेकर बाजार में सभा भी आयोजित की जा रही है। अभी छोटे दुकानदार एसयूपी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। इनसे प्रशासन को शक्ति से निपटना चाहिए।

संजय भार्गव, अध्यक्ष, सर्व व्यापार मंडल चांदनी चौक का कहना है कि एसयूपी के बदले बाजार में सस्ता विकल्प मौजूद नहीं है। छोटी दुकानों में सीमित ही खरीदारी करने के लिए आते हैं। ऐसे में उन्हें पालीथिन के लिए वापस भेजना किसी नुकसान से कम नहीं है। कपड़े व कागज के सस्ते थैले मिलेंगे तो जरूर इस्तेमाल करेंगे।

ये थैला लेकर पहुंचे

उदय (चांदनी चौक में खरीददारी करने पहुंचे ग्राहक) का कहना है कि एसयूपी पर प्रतिबंध को लेकर इसको लेकर पहले से जानकारी थी। यह एक अच्छी पहल है। इसमें युवाओं की भागीदारी को बढ़ाना चाहिए। लोगों को भी जागरूक होकर प्रशासन का साथ देना जरूरी है। वहीं, बाजार में पालीथिन में सामान लेकर जा रहे अंकित ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। वह कहते हैं कि जरूरी काम था तो बाजार से सामान लेकर जाना था।

स्थान- मंडावली नेताजी मार्केट, समय: दोपहर 1:30 बजे

एसयूपी प्रतिबंध को लेकर इस मार्केट में मिलाजुला असर देखने को मिला। कपड़े की दुकानों से ग्राहक नान वोवन बैग में सामान लेकर निकलते दिखे। उधर, किराने की दुकानों पर पालीथिन का उपयोग होता पाया गया। सब्जी और फल बेचने वाले दुकानदार भी प्रतिबंध की धज्जियां उड़ाते दिखे। आम बेच रहे सुरेंद्र ने बताया कि वह पालीथिन प्रतिबंध के बारे में जानते हैं, लेकिन उसका विकल्प उन्हें नहीं मालूम।

अमन चांदना, दुकानदार का कहना है कि यहां पर जूस विक्रेता पेपर गिलास और स्ट्रा का इस्तेमाल करते हुए दिखे। एसयूपी पर प्रतिबंध पर्यावरण हित में है। मैं तो ग्राहकों से अपील कर रहा हूं कि वह घर से कपड़े का थैला लेकर आएं। बाजार के ज्यादातर दुकानदार प्रतिबंध का पालन कर रहे हैं। वह कागज या नोन वोवन बैग में सामान दे रहें हैं। यदि कोई पालीथिन का उपयोग कर रहा है तो उनसे यही आग्रह है कि वह ऐसा न करें, दूसरा विकल्प चुनें।

इसे बनाए विकल्प

प्लास्टिक के गिलास, कटोरी, चम्मच आदि उत्पादों के विकल्प के तौर पर पत्तों व कागज से बनी वस्तुओं को उपयोग किया जा सकता है। वहीं, पालीथिन की बजाय कपड़े का थैला, कागज के थैले का उपयोग किया जा सकता है। उपहार पैक करने के लिए भी कागज का उपयोग किया जा सकता है।

सिंगल यूज प्लास्टिक के नुकसान सिंगल यूज प्लास्टिक यानि एक बार उपयोग होने वाली वस्तुएं। यह पर्यावरण के नुकसान दायक हैं। यह प्लास्टिक कूड़े में मिलकर लैंडफिल तक जाती है जो कि रिसाइकिल तक नहीं हो पाती है।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari