नई दिल्ली, एएनआइ। राजधानी दिल्ली में 20 अप्रैल से लगातार जारी लॉकडाउन व्यापार-कारोबार को पूरी तरह ठप कर दिया है। इससे उत्पादन क्षेत्र से जुड़े कामगारों की मुसीबत बढ़ गई है। ऐसे में दिल्ली-एनसीआर में रह रहे कामगार काम बंद होने से गृह राज्य बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड वापस जाने के लिए मजबूर हैं। मंगवलार सुबह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर इसका नजारा भी दिखा।  अपने गृह राज्य जा रहे एक कामगार ने समाचार एजेंसी एएनआइ को बताया कि जिसमें मैं काम करता था, वह बंद पड़ी है। इस कामगार का कहना है कि दिल्ली में रहने के दौरान हमें घर का किराया देना है और अपने घर वापस पैसे भेजने की भी जरूरत है, हम यहां कैसे रहेंगे? 

एक अन्य कामगार ने बताया- 'मैं अपने घर बिहार के आरा जा रहा हूं, क्योंकि लॉकडाउन और अन्य कारणों से कंपनी बंद हो गई है। लॉकडाउन और काम बंद होने के दौरान हम कितने दिन यहां पर भूखे रहेंगे, इसलिए मैंने सोचा कि वापस चला जाऊं। बीमारी के चलते मेरी मां भी गंभीर रूप से बीमार हैं।'  

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्यों में लॉकडाउन जैसे प्रतिबंध हैं। ऐसे में प्रवासी मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनको आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले दिनों एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी कामगारों की समस्याओं को देखते हुए दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार को निर्देश दिया और कहा है कि प्रवासियों के लिए व्यवस्थाएं करें।

प्रवासी कामगारों की मुश्किलों को कम करने के लिए कई अंतरिम निर्देश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एनसीआर क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत योजना', केंद्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकारों की अन्य योजनाओं के तहत प्रवासी मजदूरों राशन मुहैया कराएं। कोर्ट ने कहा कि प्रवासी कामगारों के लिए वे सामुदायिक रसोई शुरू करें और जो कामगार घर वापस जाना चाहते हैं उनके लिए परिवहन की व्यवस्था करें न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार प्रवासी कामगारों की जरुरतों का ख्याल रखते हुए समुचित व्यवस्था करने का निर्देश रेल मंत्रालय को दें।