नोएडा [कुंदन तिवारी]। Demonetisation वर्ष-2016 में नोटबंदी के दौरान किस कदर लोगों ने शैल कंपनियां बनाईं और उनके माध्यम से कालाधन खपाया गया। इस बात के साक्ष्य अब सामने आने लगे हैं। नोएडा में नियो अस्पताल के दो निदेशक डॉ राजीव मोतियानी व डॉ गुलाब गुप्ता के यहां सर्च कार्रवाई पूरी होने के बाद बहुत ही चौकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इसमें दोनों निदेशक ने नोटबंदी के दौरान जो नई कंपनियां बनाई थी, उसमें करोड़ों रुपये का कालाधन खपाया है। सूत्र तो यहां तक बता रहे हैं कि प्रत्येक कंपनी के खाते में 25-25 करोड़ रुपये जमा कराया गया है। ऐसे तमाम खाते आयकर की टीम के हाथ लगे हैं।

बता दें कि नियो अस्पताल के दो संचालक डॉ राजीव मोतियानी व डॉ गुलाब गुप्ता के आवास, क्लीनिक व अस्पताल में आयकर विभाग का सर्च बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे शुरू हुआ था, जो शुक्रवार सुबह साढ़े पांच बजे खत्म हुआ। करीब 18 घंटे के सर्च के दौरान भारी मात्र में नकदी व आय से अधिक संपत्ति के दस्तावेज जब्त किए गए।

तीसरी आंख ही बनी डॉक्टरों के गले की फांस

नियो अस्पताल के डॉक्टरों ने जिस सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे को लगाया था। उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी कि यही सीसीटीवी कैमरे एक दिन उनकी गले की फांस बन जाएंगे। आयकर की सर्च कार्रवाई के दौरान डॉ राजीव मोतियानी और डॉ गुलाब गुप्ता के क्लीनिक में जो सीसीटीवी लगे थे।

जब उनके फुटेज चेक किये गये तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए। इसमें भारी संख्या में मरीजों के स्वास्थ्य का निरीक्षण तो किया जा रहा था, लेकिन उनसे नकद राशि लेने के बाद उसे बिल रजिस्टर में बहुत ही कम संख्या को चढ़ाया जा रहा था। सर्च के दौरान दो माह की सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की गई। इस फुटेज को जब्त कर लिया गया है। जिसमें मरीजों का संख्या का आकलन किया गया। यह आकलन रिकार्ड से कहीं ज्यादा मिला है।

वहीं 18 घंटे चली कार्रवाई के दौरान आयकर विभाग की टीम ने राजीव मोतियानी के घर से 58 लाख रुनकद बरामद किए हैं। इसके अलावा दो लॉकर घर पर मिले है। डॉ गुलाब गुप्ता के यहां पर 20 लाख की नकदी बरामद हुई है, जिसे सीज कर दिया गया है। यहीं नहीं कई और लॉकरों को अभी खोला जाना बाकी है।

खोले जाएंगे लॉकर

डाक्टर डॉ गुलाब गुप्ता का एक लॉकर व डॉ राजीव मोतियानी के दो लॉकर मिले हैं। इन लॉकरों को सीज कर दिया गया है। कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद करीब एक सप्ताह या दस दिन के बाद इन लॉकरों को खोला जाएगा। अब तक जिस तरह के दस्तावेज मिले है उससे जाहिर है लाकरों के खुलने के बाद काफी अहम सबूत मिलेंगे।

एके जैन (सीईओ, नियो अस्पताल) का कहना है कि अस्पताल और यहां के दो डॉक्टरों को बदनाम करने की कोशिश की गई है। इस कार्रवाई से अस्पताल और यहां के प्रमुख डॉक्टरों की छवि को नुकसान हुआ है। लेकिन हम कानूनी कार्रवाई का सहारा लेंगे। हमें उम्मीद है जीत हमारी होगी।  

डॉ. राकेश मल्होत्र (प्रबंधक, नियो अस्पताल) ने छापों पर कहा कि वहीं, आयकर विभाग को अस्पताल में इस सर्वे से कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। हम अस्पताल में एक-एक मरीजों का रिकार्ड रखते हैं। यहां बिना किसी प्रिस्क्रिप्शन के किसी भी मरीज को कोई दवाएं नहीं दी जाती हैं। इस कार्रवाई से अस्पताल की छवि को ठेस पहुंचा है।  

दो फर्म में गड़बड़ी मिलने पर किया सर्च

आयकर विभाग (income tax department) को संकेत मिले थे कि इन दोनों चिकित्सकों द्वारा टैक्स चोरी व काला धन खपाया गया है। इसमे अस्पताल का कोई अहम रोल नहीं था, नियो सिर्फ एक ब्रांड है। जबकि काला धन खपाने का कार्य मुस्कान मेडिकल फर्म व नियो फार्मेसी के नाम पर किया गया। यह दोनों इसके संचालक है। इसके अलावा दो अन्य चिकित्सक इस फर्म के संचालक हैं। इन दोनों का इन फर्म में 25-25 प्रतिशत की साङोदारी है। इसके अलावा डेंटल केयर एंड ट्रामा सेंटर व न्यू वीजन फस्र्ट कम सेंटर ने यहा स्थान ले रखा है।

Posted By: JP Yadav

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