नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डा. चंद्रशेखर कंबार की अध्यक्षता में रवींद्र भवन में आयोजित अकादमी के कार्यकारी मंडल की बैठक में गैर-मान्यता प्राप्त भाषाओं के लेखकों व विद्वानों को संबंधित भाषाओं के संवर्धन में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए साहित्य अकादमी भाषा सम्मान पुरस्कार हेतु चुना गया। इनमें भोजपुरी भाषा के लिए संयुक्त रूप से डा. अशोक द्विवेदी और अनिल ओझा नीरद को चुना गया है। वहीं, तिवा के लिए होर सिंह खोलर को चुना गया है।

इनमें डा. अशोक द्विवेदी भोजपुरी और हिंदी भाषाओं के प्रख्यात लेखक एवं संपादक हैं। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से डाक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। उनकी भोजपुरी और हिंदी में 13 पुस्तकें प्रकाशित हैं।

इनमें घनानंद, अढ़ाई आखर, रामजी के सगुना, बनचरी आदि प्रमुख हैं। डा. द्विवेदी की रचनात्मक प्रतिभा, संगठनात्मक क्षमता और भोजपुरी भाषा और साहित्य के लिए उनका समर्पण सराहनीय है। अनिल ओझा नीरद एक जाने माने भोजपुरी विद्वान हैं। उन्होेेंने कोलकाता विश्वविद्यालय से हिंदी में परास्नातक की डिग्री प्राप्त की है। भोजपुरी में उनकी छह रचनाएं प्रकाशित हैं। इनमें माटी के दीया, वीर सिपाही मंगल पांडे, पिंजरा के मोल, गुरु दक्षिणा तथा कहत कबीर प्रमुख हैं। उन्होंने विविध विधाओं में रचनात्मक लेखन के साथ-साथ भोजपुरी से इतर क्षेत्रों में भोजपुरी के प्रचार-प्रसार के लिए अतुलनीय योगदान दिया है।

होरसिंह खोलर एक प्रख्यात तिवा विद्वान हैं। उनकी आठ रचनाएं प्रकाशित हैं। उनकी रचनाओं में पलांग्शी, सिगारुने संजुली, चोंगमई, अदला रे थेनदुने सदरा तथा पनत शाला शामिल हैं। पिछले दो दशकों से तिवा भाषा के साहित्यिक विस्तार में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपये की राशि उत्कीर्ण ताम्रफलक और प्रशस्ति पत्र इन भाषा सम्मान विद्वानों को साहित्य अकादमी द्वारा बाद में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किए जाएंगे।

Edited By: Mangal Yadav