नई दिल्ली, जेएनएन। छठ महापर्व मनाने के लिए घर जानेवालों की उमड़ रही भीड़ के आगे रेल प्रशासन पसीने छूट रहे हैं। प‍िछले दो द‍िनों से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और आनंद विहार टर्मिनल पर बिहार जाने वाली ट्रेनों में सवार होने के लिए आपाधापी मची हैं। स्लीपर कोच में प्रवेश के लिए कई लोग आपातकालीन खिड़की का प्रयोग करते देखे जा सकते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भीड़ का आलम क्या होगा।

पटना के लिए तीन स्‍पेशल ट्रेन
ऐसी स्थिति में कंफर्म टिकट होने के बावजूद कई यात्री ट्रेन में सवार नहीं हो सके। भीड़ को देखते हुए शनिवार को अल्प सूचना के आधार पर पटना के लिए तीन विशेष ट्रेनें चलानी पड़ी। शनिवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के अजमेरी गेट की ओर व आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर मेले जैसा दृश्य था।

स्‍टेशन पर मेले का दृश्‍य
यात्री भारी-भरकम बैग सिर पर रखे किसी तरह ट्रेन में सवार होने की कोशिश कर रहे थे। पहले उन्हें प्लेटफॉर्म पर पहुंचने के लिए लंबी लाइन में लगनी पड़ती थी और फिर ट्रेन में सवार होने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती थी। जिनके पास वातानुकूलित श्रेणी के टिकट थे, उन्हें तो थोड़ी राहत थी, लेकिन जनरल कोच व स्लीपर क्लास में सवार होना जंग जीतने के बराबर था।

सीट पाना जंग जीतने जैसा 
लोगों को कोच में घुसने के लिए कुली का सहारा लेना पड़ रहा था। आपातकालीन खिड़की से प्रवेश के लिए भी आपाधापी मची थी। भीड़ के आगे बेबस थे सुरक्षा में तैनात जवान भीड़ संभालने के लिए स्टेशनों पर काफी संख्या में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) व रेलवे सुरक्षा विशेष बल (आरपीएसएफ) जवानों के साथ ही भारत स्काउट व सिविल डिफेंस के प्रतिनिधि भी स्टेशनों पर तैनात थे।

व्‍यवस्‍था धरी-की-धरी
इसके बावजूद पूर्व दिशा की ओर जाने वाली ट्रेनों के आते ही सारी व्यवस्था धरी की धरी रह जाती थी। भीड़ के आगे आरपीएफ के जवान व रेलकर्मी भी बेबस नजर आ रहे थे। विशेष अनारक्षित ट्रेनें भी नहीं दिला सकीं बड़ी राहत रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्री किसी तरह छठ पर अपने घर पहुंच जाएं, इसके लिए जरूरी प्रबंध किए गए हैं।

100 स्‍पेशल ट्रेनें 
लगभग 100 विशेष ट्रेनें घोषित की गई हैं। भीड़ बढ़ने पर विशेष अनारक्षित ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं। शनिवार को पटना के लिए आनंद विहार टर्मिनल से एक और नई दिल्ली से दो विशेष अनारक्षित ट्रेनें चलाई गईं। 8 व 9 नवंबर को भी पटना के लिए अल्प सूचना के आधार पर विशेष ट्रेनें चलाई गई थीं। जरूरत के अनुसार और भी ट्रेनें चलाई जाएंगी।