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2020 Delhi Riots: हिंसा से पहले पीएफआइ के बैंक खातों में आए थे 120 करोड़ रुपये

2020 Delhi Riots दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पांच माह से पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआइ) और ताहिर के बैंक खातों की जांच की जा रही है। यह अब अंतिम चरण में पहुंच गई है।

By JP YadavEdited By: Published: Sat, 26 Sep 2020 09:10 AM (IST)Updated: Sat, 26 Sep 2020 09:10 AM (IST)
2020 Delhi Riots: हिंसा से पहले पीएफआइ के बैंक खातों में आए थे 120 करोड़ रुपये
उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की सांकेतिक फोटो।

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। 2020 Delhi Riots : नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध के नाम पर दंगे भड़काने की साजिश में जुटे लोगों को धन मुहैया कराने वालों के चेहरे भी जल्द ही बेनकाब होंगे। दरअसल, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पांच माह से पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआइ) और ताहिर के बैंक खातों की जांच की जा रही है। यह अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। पूर्व निगम पार्षद ताहिर हुसैन, उमर खालिद, खालिद सैफी सहित अन्य साजिशकर्ताओं पर दंगाइयों को रुपये बांटने का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियों को पता चला है कि दंगे से पहले पीएफआइ के बैंक खातों में देश-विदेश से 120 करोड़ रुपये आए थे।

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अब जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि यह रुपये किन बैंक खातों के जरिये पीएफआइ के खाते में आए हैं। इसके साथ ही यह भी जानकारी मिली है कि ताहिर को दंगे से कुछ दिन पहले पीएफआइ सहित कई संदिग्ध संस्थाओं के जरिये उमर खालिद, खालिद सैफी और अन्य साजिशकर्ताओं ने करोड़ों रुपये मुहैया कराए थे। यही नहीं ताहिर और उसके रिश्तेदारों के स्वामित्व वाली कंपनियों द्वारा बड़ी मात्रा में पैसा संदिग्ध संस्थाओं और हवाला के जरिये मुहैया कराए जाने की बात भी जांच में सामने आई थी। इसी के चलते दो माह पहले ईडी ने दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ताहिर और उससे जुड़े सहयोगियों के ठिकानों पर छापा मारा था। वहां से भी ईडी को कई अहम सबूत मिले हैं।

सेल का कहना है कि जनवरी में पहली बार इंडिया अगेंस्ट हेट के संस्थापक खालिद सैफी ने ताहिर का परिचय उमर खालिद से कराया था। इसके बाद इन लोगों की दंगे की तैयारियों को लेकर लगातार बैठकें होने लगीं। आठ जनवरी को शाहीनबाग में धरनास्थल के पास पीएफआइ के कार्यालय में भी इनकी गोपनीय बैठक हुई थी। इस बैठक के कुछ दिन बाद ही उमर खालिद, खालिद सैफी व पीएफआइ के सदस्यों ने अलग-अलग लोगों के जरिये ताहिर को 1.10 करोड़ रुपये नकद दिला दिए थे। यह रुपये ताहिर ने पिंजरा तोड़ संगठन की छात्रओं व जामिया कोआर्डिनेशन कमेटी के सदस्यों को दिए थे।

सिमी का पदाधिकारी रहा है उमर का पिता

उमर खालिद का पिता भी प्रतिबंधित संगठन सिमी का पदाधिकारी रह चुका है। सिमी पर प्रतिबंध के बाद से ही पीएफआइ को मजबूत किया गया है। ऐसे में खालिद के इस संगठन से गहरे रिश्ते हैं। इसका फायदा उठाकर उसने दंगे के लिए मोटी रकम का इंतजाम पीएफआइ के जरिये कराया था।

उमर खालिद के पक्ष में उतरे 15 पूर्व न्यायाधीश

दंगे के आरोपित उमर खालिद के पक्ष में अलग-अलग हाई कोर्ट के 15 पूर्व न्यायाधीशों ने पत्र लिखा है। इनमें दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सीएन ढींगरा व एमसी गर्ग, जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीसी पटेल, मुंबई हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केआर व्यास व अन्य शामिल हैं। पत्र में लिखा गया है कि कुछ लोग उमर की गिरफ्तारी के संबंध में अपना एजेंडा सेट कर रहे हैं। ये वे लोग हैं, जो किसी भी मौके पर देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को नहीं बख्शते हैं। न्याय प्रक्रिया के दौरान किसी को सिर्फ सुबूतों के आधार पर ही दोषी ठहराया जा सकता है।

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