नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। Weather Update: दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में मौसम के मिजाज में बदलाव जारी है। मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच कभी तेज धूप, कभी बारिश और कभी धूल भरी आंधी चल रही है। भारतीय मौसम विभाग (Indian Meteorological Department) के मुताबिक, मौसम में इस तरह का बदलाव पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से हो रहा है। इससे दिल्ली-एनसीआर का तापमान 4 डिग्री तक गिर जाएगा और तापमान में इतनी गिरावट चौंकाने वाली होगी। यूं भी मौसम विभाग पहले ही कह  चुका है कि इस बार दिल्ली-एनसीआर में गर्मियों के दौरान मौसम में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

वहीं, मौसम विभाग की यह भी भविष्यवाणी है कि अगले सप्ताह मंगलवार व बुधवार को दिल्ली में 60 से 70 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से धूल भरी आंधी आ सकती है। इसके बाद हल्की बारिश की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम में बदलाव हो रहा है। इसी वजह से शनिवार, रविवार व सोमवार को दिन में बादल छाए रहने और तेज हवा चलने की संभावना है।

पश्चिमी विक्षोभ की वजह से ही शुक्रवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। तेज हवा चलने और विभिन्न इलाकों में हल्की बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले सप्ताह 16 अप्रैल (मंगलवार) से फिर ऐसा ही नजारा देखने को मिलेगा। पश्चिमी विक्षोभ की वजह से आए बदलाव के चलते शुक्रवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान गिरकर 36.8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जो सामान्य से महज एक डिग्री अधिक है। न्यूनतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस रहा जो कि सामान्य से दो डिग्री अधिक है।

होगी बारिश, गिरेगा तापमान

गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर के साथ पूरे उत्तर भारत में गर्मी शबाब पर पहुंचती दिखाई दे रही है, लेेकिन आने वाले दिनों में इससे राहत भी मिलेगी। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने का सबसे अधिक असर दिल्ली-एनसीार के मौसम पर देखने को मिलेगा। इसके चलते मंगलवार और बुधवार को तेज हवा के साथ बरसात भी हो सकती है। इससे तापमान में चार डिग्री तक की गिरावट आएगी।

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (Western Disturbance) क्या है?

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (Western Disturbance) जिसको पश्चिमी विक्षोभ भी बोला जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी इलाक़ों में सर्दियों के मौसम में आने वाले ऐसे तूफ़ान को कहते हैं जो वायुमंडल की ऊंची तहों में भूमध्य सागर, अटलांटिक महासागर और कुछ हद तक कैस्पियन सागर से नमी लाकर उसे अचानक वर्षा और बर्फ़ के रूप में उत्तर भारत, पाकिस्तान व नेपाल पर गिरा देता है। यह एक गैर-मानसूनी वर्षा का स्वरूप है जो पछुवा पवन (वेस्टर्लीज) द्वारा संचालित होता है।

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस या पश्चिमी विक्षोभ का निर्माण कैसे होता है?

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस या पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर में अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के रूप में उत्पन्न होता है। यूक्रेन और उसके आस-पास के क्षेत्रों पर एक उच्च दबाव क्षेत्र समेकित होने के कारण, जिससे ध्रुवीय क्षेत्रों से उच्च नमी के साथ अपेक्षाकृत गर्म हवा के एक क्षेत्र की ओर ठंडी हवा का प्रवाह होने लगता है। यह ऊपरी वायुमंडल में साइक्लोजेनेसिस के लिए अनुकूल परिस्थितियां उत्पन्न होने लगती है, जो कि एक पूर्वमुखी-बढ़ते एक्सट्रैटॉपिकल डिप्रेशन के गठन में मदद करता है। फिर धीरे-धीरे यही चक्रवात ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के मध्य-पूर्व से भारतीय उप-महाद्वीप में प्रवेश करता है।

भारतीय उप-महाद्वीप पर वेस्टर्न डिस्टर्बेंस या पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस या पश्चिमी विक्षोभ खासकर सर्दियों में भारतीय उपमहाद्वीप के निचले मध्य इलाकों में भारी बारिश तथा पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कृषि में इस वर्षा का बहुत महत्व है, विशेषकर रबी फसलों के लिए। उनमें से गेहूं सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है, जो भारत की खाद्य सुरक्षा को पूरा करने में मदद करता है।

ध्यान दें कि उत्तर भारत में गर्मियों के मौसम में आने वाले मानसून से वेस्टर्न डिस्टर्बेंस या पश्चिमी विक्षोभ का बिलकुल कोई संबंध नहीं होता। मानसून की बारिशों में गिरने वाला जल दक्षिण से हिंद महासागर से आता है और इसका प्रवाह वायुमंडल की निचली सतह में होता है। मानसून की बारिश ख़रीफ़ की फ़सल के लिए ज़रूरी होती है, जिसमें चावल जैसे अन्न शामिल हैं। कभी-कभी इस चक्रवात के कारण अत्यधिक वर्षा भी होने लगती है जिसके कारण फसल क्षति, भूस्खलन, बाढ़ और हिमस्खलन होने लगता है।

दिल्ली-NCR की ताजा खबरों को पढ़ने के लिए यहां करें क्लिक

Posted By: JP Yadav

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप