नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। Delhi Electricity Commuters Alert !  दिल्ली में बिजली मीटर बदलने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दायर की गई याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए महत्वपूर्ण फैसला दिया है। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने कहा कि बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड को अधिकार है कि वह पुराने मीटर को नवीनतम तकनीक वाले मीटर से बदल सके। पीठ ने कहा कि याचिका में दलील दी गई है कि बीएसईएस ने मीटर बदलने का कोई कारण नहीं दिया है, साथ ही यह भी दलील दी कि अगर मीटर दोषपूर्ण नहीं है तो मीटर को बदला नहीं जा सकता है। हालांकि, वसंत कुंज निवासी याचिकाकर्ता व अधिवक्ता इस संबंध में कोई कानून व नियम नहीं पेश कर सके, जोकि बीएसईएस को नवीनतम तकनीक वाले मीटर लगाने से प्रतिबंधित करता हो।

पीठ ने इसके साथ ही बीएसईएस को निर्देश दिया कि एक अक्टूबर, 2019 को जारी नोटिस के तहत नवीनतम तकनीक वाला मीटर लगाए और अगर याचिकाकर्ता इसमें अड़चन पैदा करते है तो कानून के हिसाब से उसके खिलाफ कार्रवाई करने को वह स्वतंत्र है। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने बीएसईएस की तरफ से पेश की गई दलील को सही ठहराया कि आइएसआइ मार्क वाले मीटर सभी जगह पर बदले जा रहे हैं। इस संबंध में याचिकाकर्ता को एक अक्टूबर, 2019 को नोटिस दिया गया था। जिसमें कहा गया था कि बिजली वितरण प्रणाली को अपग्रेड करने के लिए नवीनतम तकनीक वाले मीटर लगाए जाएंगे।

इतना ही नहीं नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया था कि मीटर को नि:शुल्क बदला जाएगा और उपभोक्ता को इससे जुड़े केबल और सर्विस के लिए कोई भुगतान नहीं करना होगा। पीठ ने कहा कि बीएसईएस के तमाम प्रयास के बावजूद भी याची ने सहयोग नहीं किया और लगातार बिना किसी कारण के मीटर बदले जाने का विरोध करता रहा। इतना ही नहीं याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने भी बिना कोई वैध आधार बताए मीटर बदलने का विरोध किया।

वहीं, दूसरी तरफ याचिकाकर्ता अधिवक्ता ने आरोप लगाया था कि बीएसईएस ने पांच मार्च, 2021 को कनेक्शन काटने के संबंध में नोटिस भेजा था, जिसमें लिखा था वर्तमान मीटर ऐसे स्थान पर है जो याची ने लाक कर रखा है। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि वह वसंत कुंज निवासी है और यहां पर सभी के मीटर सीढि़यों पर लगे हैं।

उन्होंने इस पर न तो कोई ताला लगाया है और न ही मीटर निरीक्षण करने से किसी को रोका है। याचिकाकर्ता की दलील पर पीठ ने बीएसईएस को याची के घर का निरीक्षण करने का निर्देश देते हुए कहा कि निरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने तक कनेक्शन काटने के संबंध में रोक जारी रहेगी।

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