नई दिल्ली [सुधीर कुमार पांडेय/किशन कुमार]। जंगल का राजा कहा जाता है शेर, लेकिन यह शिकार करने में बहुत सफल नहीं हो पाता है। दक्षिण अफ्रीका और भारत में ही मिलते हैं। भारत में खासकर गुजरात के गिर के जंगलों और काठियावाड़ के क्षेत्र में। कैट (बिल्ली) फैमिली में यह दूसरा सबसे बड़ा सदस्य है। इससे बड़ा टाइगर यानी बाघ होता है, जिसकी लंबाई करीब 13 फुट और वजन करीब 300 किलोग्राम होता है। नेशनल जियोग्राफिक की मानें तो अफ्रीकी शेर की लंबाई दस फुट और वजन करीब 227 किलोग्राम होता है। आठ किलोमीटर दूर तक शेर की दहाड़ सुनाई देती है। जन्म लेते ही इनकी आवाज आने लगती है। जन्म लेने के एक साल बाद इनकी दहाड़ सुनाई देती है। ये परिवार में रहते हैं। शेर बहुत अच्छा शिकारी नहीं होता है, लेकिन ये बहुत अधिक मीट खाते हैं। इनके शिकार करने की औसत सफलता दर करीब तीस फीसद है। ये नौ किलो मीट एक दिन में खा सकते हैं। बीमारियों, शिकार और आवासन की समस्या की वजह से इनकी संख्या कम हो रही है। अफ्रीका के जंगलों में करीब बीस हजार ही शेर बचे हैं।

शेरों के मुकाबले बाघ होते हैं ज्यादा उग्र

विशेषज्ञों की मानें तो शेरों के मुकाबले बाघ ज्यादा उग्र होते हैं। ऐसा माना जाता है कि शेर आलसी होते हैं और तब तक कुछ नहीं करते, जब तक उन्हें किसी तरह की जरूरत नहीं होती है। शेर ज्यादातर समूह में रहना पसंद करते हैं। समूह के लिए मादा शेरनी शिकार करती है। वहीं बाघ शिकार करना पसंद करते हैं। वे अपना शिकार खुद करते हैं। शेर, बाघ व तेंदुआ आमतौर पर तब हमला करते हैं जब मादा अपने बच्चों के साथ हो, अपने क्षेत्र में किसी व्यक्ति के दखल देने की स्थिति में या वह आदमखोर है। यदि ऐसे जीव सामने हों तो घूरने के बजाय सहज भाव से देखें। भागने पर शिकार समझ लेगा और बैठने पर दूसरा जानवर समझेगा। बेहतर है कि उसे देखते हुए बगैर मुड़े पीछे की ओर धीरे-धीरे बढ़ें।

चिड़ियाघर कर्मियों की तत्परता से बची जान

बता दें कि बृहस्पतिवार को शेर के बाड़े में कूदे युवक रेहान की जान बचाने के लिए चिड़ियाघर के कर्मियों ने तत्परता के साथ बहादुरी भी दिखाई। यदि घटनास्थल पर पहुंचने पर कर्मियों की थोड़ी भी देर हो जाती है तो राजधानी के इस चिड़ियाघर में एक बार फिर बड़ा हादसा हो जाता। रेहान करीब पंद्रह मिनट तक बाड़े में रहा और उसका बाल बांका भी नहीं हुआ।

चिड़ियाघर के अधिकारियों के मुताबिक सूचना मिलते ही सुरक्षा सुपरवाइजर रोहित कुमार व रेंजर सौरभ वशिष्ठ तुरंत मौके पर पहुंचे। मेडिकल टीम से वन्यजीव सेक्शन के प्रभारी डॉ. मनोज व डॉ. विकास, पोलोस व रजनीश पांडे ने वहां पहुंचकर हालात को स्थिर करने की कोशिश की। निदेशक रेणु सिंह भी दिशा-निर्देश दे रही थीं। शेर की हलचल को देखकर मेडिकल टीम ने बाड़े के पास खड़े होकर शेर को उसके नाम (सुंदरम) से आवाज दी। शेर आवाज सुनकर लोहे के जाल के पास पहुंचा। इसी बीच मेडिकल टीम ने जाल में से एक लकड़ी डालकर उसे उलझाने का काम किया। वहीं, रोहित व सौरभ बाड़े से बाहर निकलने के लिए रेहान को आवाज दे रहे थे, लेकिन वह बाहर आने को तैयार नहीं था। इसी दौरान मेडिकल टीम ने गन से शेर को बेहोशी की दवा दी। इससे शेर निष्क्रिय होने लगा।

बाड़े में कूदे अधिकारी

युवक को बाहर न निकलता देख चिड़ियाघर कर्मी सौरभ व रोहित दोनों 18 फुट ऊंचे जाल पर चढ़कर बाड़े में उतर गए। उनके पीछे चंद्रशेखर, लेखराज, प्रदीप, शत्रुघ्न, सूर्यप्रताप और कुलदीप समेत आठ लोग भी बाड़े में उतरे। कर्मी जैसे ही रेहान के पास पहुंचे तो वह कहने लगा कि आप यहां से चले जाओ मैं यहां मरने के लिए आया हूं। कर्मियों ने उसे पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह बाड़े में ही बनी 20 फुट गहरी खाई में कूद गया। खाई में पांच फुट तक पानी भरा हुआ था। इस दौरान मेडिकल टीम शेर को उलझाए हुए थी। युवक के कूदने के बाद कर्मियों ने भी पानी में छलांग लगा दी। पकड़ने के बाद उसे सामान्य रास्ते से बाहर लाया गया।

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Posted By: JP Yadav

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