नई दिल्ली [राज्य ब्यूरो]। एम्स में बुजुर्गों के स्वास्थ्य और हड्डियों की बीमारी पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शुक्रवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह व केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे शामिल हुए। इस दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार बुजुर्गों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए कई कदम उठा रही है। सरकार लोगों को किफायती स्वास्थ्य सुविधाएं व यूनिवर्सल हेल्थ कवर देना चाहती है। आयुष्मान भारत उस दिशा में ही उठाया गया कदम है। इसके साथ ही बुजुर्गों को भावनात्मक सहारे की भी जरूरत है।

विदेशों में बढ़ा संयुक्त परिवार का चलन 
राजनाथ सिंह ने कहा कि बुजुर्गों में हड्डी व कूल्हे का फ्रैक्चर कष्टदायक होता है। इसलिए यह कोशिश होनी चाहिए कि फ्रैक्चर न होने पाए। बुजुर्गों में फैक्चर की समस्या को रोकने के लिए एम्स के डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे प्रयास की उन्होंने सराहना की और कहा कि वर्तमान समय में देश में 13 करोड़ लोग 60 साल से अधिक उम्र वाले हैं। वर्ष 2050 तक बुजुर्गों की आबादी करीब 34 करोड़ होगी। पहले संयुक्त परिवार होता था। यह विडंबना है कि एकल परिवार का चलन बढ़ रहा है। जबकि विदेशों में संयुक्त परिवार का चलन बढ़ने लगा है। इस उम्र में भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है। जब वह नहीं मिलता है तो बुजुर्ग टूट जाते हैं।

विदेशों में कम हो रहा है वृद्धाश्रम का चलन
अश्विनी चौबे ने कहा कि वृद्धाश्रम का चलन विदेशों में कम हो रहा है। अब लोग बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में नहीं बल्कि साथ रखना पसंद कर रहे हैं, यह हमारे देश की पहले से परंपरा रही है। देश में 90 फीसद बुजुर्ग बिना बीमा के हैं। इसमें से 70 फीसद बुजुर्ग गांवों में हैं। इसका असर इलाज पर पड़ता है। आयुष्मान भारत योजना से इसकी भरपाई हो सकेगी।

सरकार को नीति तैयार करने का प्रस्ताव
इस सम्मेलन का आयोजन जेरियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सोसायटी, फ्रैजिलिटी फ्रैक्चर नेटवर्क (एफएफएन-इंडिया) व एम्स ने मिलकर किया है। इसमें कई देशों के डॉक्टरों ने हिस्सा लिया और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए हड्डियों की मजबूती व सुरक्षित बुढ़ापा विषय पर चर्चा की। साथ ही बुजुर्गों में हड्डियों की बीमारी व कूल्हा फ्रैक्चर की बीमारियों की रोकथाम के लिए नीति तैयार करने का प्रस्ताव केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह व केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे को सौंपा।