नई दिल्ली[संतोष कुमार सिंह]। कारगिल युद्ध की विजय गाथा की जानकारी देने के लिए विशेषतौर पर तस्वीरों से सजाई गई काशी विश्वनाथ ट्रेन को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और रेल राज्यमंत्री सुरेश अंगड़ी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी भी मौजूद रहीं।

कारगिल विजय के 20 वर्ष पूरे होने पर भारतीय रेल भी इसे यादगार बना रहा है। उसने इसकी गाथा ट्रेन के माध्यम से देश के कोने-कोने में पहुंचाकर नई पीढ़ी को प्रेरित करने की योजना तैयार की है। इसके लिए उत्तर रेलवे की 10 ट्रेनों को विशेष तौर पर सजाया जा रहा है। विनाइल रैपिंग के माध्यम से इन ट्रेनों के कोच पर करगिल युद्ध से जुड़ी तस्वीरें लगाई जा रही हैं।

इस तरह की पहली ट्रेन नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चलने वाली काशी-विश्वनाथ एक्सप्रेस है। इसे सोमवार को केंद्रीय  रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी और केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने हरी झंडी दिखाकर रवाना। इस मौके पर रेल और सैन्य अधिकारियों के साथ ही कारगिल युद्ध के शहीदों के परिजन भी उपस्थित रहे। 

कारगिल युद्ध का इतिहास

वर्ष 1999 में कारगिल की पहाड़ियों पर पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कब्जा जमा लिया था। इसकी जानकारी मिलने पर भारतीय सेना के जवानों ने दुश्मनों को खदेड़कर चोटियों पर तिरंगा फहराया था। दुश्मनों को देश की सीमा से खदेड़ने के लिए तीन मई से 26 जुलाई तक युद्ध चला था। प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को देशभर में भारतीय सेना के सम्मान में ‘विजय दिवस’मनाया जाता है।

इन ट्रेनों में दिखेगी वीरता की झलक

- काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस

- ब्रह्मपुत्र मेल

- सीमांचल एक्सप्रेस

- गोंडवाना एक्सप्रेस

- गोवा संपर्क क्रांति एक्सप्रेस

- नांदेड़-अंब अंदौरा सुपर फास्ट एक्सप्रेस

- स्वराज एक्सप्रेस, सवरेदय एक्सप्रेस, श्री वैष्णो देवी कटड़ा-हापा एक्सप्रेस, श्री वैष्णो देवी कटड़ा-जामनगर एक्सप्रेस

- अमृतसर-कुचुवेल्ली एक्सप्रेस

- निजामुद्दीन-पुणो एसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस

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Posted By: Mangal Yadav

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