नई दिल्ली[बिजेंद्र बंसल]। कैथल से कांग्रेस विधायक रणदीप सुरजेवाला को पार्टी ने जींद उपचुनाव में जिस तरह अचानक उतारा है, उससे राजनीतिक विश्लेषक भी हैरान हैं। दरअसल, प्रत्याशी तय करने के लिए बुधवार को कांग्रेस के वार रूम में पर्यवेक्षक केसी वेणुगोपाल की अध्यक्षता में दो बैठक हुईं। बैठक सुबह 10.30 बजे शुरू हुई, तभी पता चला कि भाजपा ने कृष्ण मिढ्डा को प्रत्याशी बनाया है।

इसके बाद तय हुआ कि मजबूत जाट उम्मीदवार ढूंढ़ा जाए। इसके बाद शाम को साढ़े सात बजे बैठक हुई। इसमें पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, विधायक कुलदीप बिश्नोई और रणदीप सुरजेवाला ने निर्दलीय उम्मीदवार जयप्रकाश के बेटे विकास सहारण को उम्मीदवार बनाने की बात कही।

बैठक में इसपर सहमति भी बन गई। लेकिन प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर को यह बात अच्छी नहीं लगी कि चार साल पहले जिसने कांग्रेस प्रत्याशी को हराया, उसे पार्टी उपचुनाव लड़ने का न्योता दे रही है। इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जाएगा। ऐसे में उन्होंने विकास के नाम पर विरोध जताया।

अशोक तंवर ने अपने कार्यालय जाकर पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को सारी बात बताई। उन्होंने जाट उम्मीदवार पर तो सहमति जताई, लेकिन जयप्रकाश के बेटे को टिकट का विरोध नीतिगत रूप में किया। राहुल गांधी को यह बात समझ में आ गई। ऐसे में रात करीब 10:20 बजे जब राहुल के तुगलकलेन स्थित निवास पर तंवर के साथ पर्यवेक्षक केसी वेणूगोपाल और रणदीप सुरजेवाला भी थे।

राहुल गांधी ने रणदीप सुरजेवाला को इशारा कर पूछा, आप क्यों नहीं? राहुल के इशारे पर रणदीप मुस्कुराए तो राहुल यह कहकर चले गए कि रणदीप को कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में घोषित कर दें। ऐसे में राहुल गांधी ने सिर्फ दो मिनट में तय कर दिया कि सुरजेवाला उम्मीदवार होंगे।

राहुल से इशारा मिलते ही पर्यवेक्षक ने कांग्रेस महासचिव मुकुल वासनिक से रणदीप के नाम का लेटर टाइप कराया और प्रेस को जारी करवा दिया। वहीं, डॉ. तंवर तब भी सोए नहीं। वह अपने कार्यालय गए और सुरजेवाला का टिकट बनाकर खुद उनके निवास पर रात 11:15 बजे देने गए।

Posted By: Prateek Kumar

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