नई दिल्ली, जेएनएन। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्रवास के नए नियमों को लेकर तकरार बढ़ती ही जा रही है। बुधवार को भी जेएनयू प्रशासन के खिलाफ छात्र संघ और उनके समर्थन में विभिन्न वामपंथी छात्र संगठनों की तरफ से प्रदर्शन कर विरोध जताया गया। छात्र पिछले दस दिनों से इस मामले में विरोध जता रहे हैं।

जेएनयू प्रशासन ने बुधवार को छात्रवास के नए नियमों के सिलसिले में बातचीत करने के लिए छात्रवास के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ छात्रों की बैठक बुलाई थी। छात्र संघ की तरफ से दावा किया गया कि पांच खंडों के प्रोवेस्ट (छात्रवास खंड अधिकारी) में से दो ने नियमों को अस्वीकार्य किया है और तीन ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं जेएनयू प्रशासन की कार्यकारी छात्र डीन डॉ. वंदना मिश्र ने बताया कि किसी भी प्रोवेस्ट ने इंटर हॉल एडमिनिस्ट्रेशन (आइएचए) द्वारा लागू किए गए छात्रवास के नए नियमों को अस्वीकार नहीं किया है और न ही किसी ने इसे खारिज किया है।
 
उन्होंने बताया कि प्रोवेस्ट को प्रदर्शनकारी छात्रों ने डराया-धमकाया और जबरन कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए, जिन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है। जेएनयू समुदाय को हम सूचित करते हैं कि सोशल मीडिया पर प्रोवेस्ट के हस्ताक्षर किए गए दस्तावेजों को न मानें, जिनमें उन्होंने छात्रवास के नए नियमों को अस्वीकार किया और अपने पद से इस्तीफा दिया है।
 
जेएनयू में 18 छात्रवास हैं, जिसे पांच खंडों में बांटा गया इन खंडों में प्रोवेस्ट एक प्रशासनिक पद है, जिसमें शिक्षक नियुक्त होते हैं। यह अपने अधीन आने वाले सभी छात्रवासों की कार्य पद्धति पर नजर रखते हैं।
 
जेएनयू छात्रसंघ के उपाध्यक्ष साकेत मून ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन ने छात्रवास की कई गुना फीस बढ़ा दी है। इसके सिलसिले में हम लगातार विरोध कर रहे हैं। फीस वृद्धि से सीधे संस्थान के 40 फीसद उन छात्रों पर असर पढ़ेगा, जिनके परिवार की आए एक लाख 44 हजार रुपये सालाना है।
 
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Posted By: Pooja Singh

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