नई दिल्ली, जेेएनएन। दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। पड़ोसी राज्यों हरियाणा और पंजाब में भारी मात्रा में पराली जलाने से इस मौसम में प्रदूषण की सबसे खराब स्थिति बन गई है। आलम यह है कि मंगलवार को सुबह स्थिति 'बेहद गंभीर' होने के कगार पर पहुंच गई और दोपहर बाद हालात बदतर हो गए। दिल्ली के साथ एनसीआर के नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद आदि जगहों पर स्मॉग छा गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह स्थिति अगले दो दिन तक बनी रहेगी। 

इस बीच पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) के चेयरमैन भूरेलाल ने कहा है कि एक नवंबर से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू होगा। हमें उम्मीद है कि हालात में सुधार होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो प्राइवेट वाहनों को सड़क पर उतरने नहीं दिया जाएगा और लोग सार्वजनिक परिवहन प्रणाली का ही उपयोग कर सकेंगे। मालूम हो कि इससे पहले भी दिल्ली में प्रदूषण स्तर बढ़ने पर निजी वाहनों के लिए ऑड इवन (सम-विषम) व्यवस्था लागू की जा चुकी है।

वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आकड़ों के अनुसार, दिल्ली में वायु गुणवत्ता 397 दर्ज की गई जो 'बेहद गंभीर' स्तर से तीन अंक नीचे और इस मौसम में प्रदूषण के लिहाज से सर्वाधिक है। वहीं, दिल्ली ज्यादार इलाकों में वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है।

केंद्र की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान और अनुसंधान प्रणाली (एसएएफएआर) ने वायु गुणवत्ता की बदतर होती स्थिति के पीछे पिछले 24 घंटे में भारी मात्रा में पराली जलाने और हवा की धीमी गति है।

एसएएफएआर के मुताबिक, मंगलवार को पीएम 2.5 में इजाफा पराली जलाने से हुआ है, वहीं पीएम 2.5 इस मौसम का सर्वाधिक 251 दर्ज किया गया। पीएम-10 के मुकाबले बारीक कण लोगों के स्वास्थ्य के लिहाज से अधिक चिंताजनक हैं। 

उधर, सीपीसीबी के आकड़ों के अनुसार, दिल्ली में पीएम 10 का स्तर 453 दर्ज किया गया। एसएएफएआर ने बताया कि बुधवार और बृहस्पतिवार को प्रदूषण के बढ़ने की आशंका जताई है।

 

राजधानी में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, लेकिन प्रशासन इस पर सख्त नहीं है। इस बात के सबूत सुप्रीम कोर्ट की ओर से पर्यावरण के मामले में गठित की गई कमेटी के चेयरमैन डॉ. भूरेलाल ने पिछले दिन पेश किए। उन्होंने यह सबूत सोमवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल की अध्यक्षता में आयोजित मीटिंग में दिए।

मीटिंग में पर्यावरण एवं वन मंत्री इमरान हुसैन समेत एमसीडी और सरकार के अन्य प्रमुख अधिकारी भी मौजूद थे। ईपीसीए के चेयरमैन डॉ. भूरेलाल ने नांगलोई, द्वारका, टीकरी कलां, मुंडका, पीरागढ़ी, कमरूद्दीन नगर, हिरण कूदना इत्यादि क्षेत्रों में अपने दौरे के दौरान ली गईं तस्वीरें दिखाईं। इनमें नियमों का उल्लंघन साफ दिखाई दे रहा है। 

इसके साथ ही दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य सचिव ने तस्वीरों के माध्यम से दिखाया कि सड़कों के किनारे खुले में कूड़ा जलाया जा रहा है।

8 घंटे में ही 45 प्वाइंट बढ़ गया एक्यूआई
दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में आबोहवा बहुत खराब स्थिति में बनी हुई है। यह जल्द ही गंभीर की स्थिति में पहुंचने वाली है। इस बात का अंदाजा एक छोटे से आकलन से लगाया जा सकता है। सोमवार को आठ घंटे में एक्यूआइ 45 प्वाइंट तक बढ़ता हुआ दिखाई दिया।

दिल्ली में बीते सालों में जिस तरह से प्रदूषण बढ़ रहा है, वह ब्रेन स्ट्रोक की भी एक बड़ी वजह बन रहा है। यह बात सोमवार को विश्व स्ट्रोक दिवस पर इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आई। यहां ब्रेन स्ट्रोक के बाद जीवित बचे 200 लोगों ने अनुभव साझा किए। 

Posted By: JP Yadav

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