नई दिल्ली (जेएनएन)। दिल्ली में निजी वाहन खासकर कार रखना जल्द ही महंगा हो सकता है। रोड टैक्स के साथ पार्किंग दर भी बढ़ सकती है। निजी वाहनों को हर साल फिटनेस टेस्ट से भी गुजरना होगा। राजधानी में मलबे को डंप करने के लिए अलग से लैंडफिल साइट भी बनाई जाएंगी।

वहीं, शादी विवाह में भी एलईडी लाइट का प्रयोग करना होगा। रेहड़ी-खोमचों पर भी केरोसिन और कोयले का उपयोग बंद होगा। सड़कों पर साइकिल और पैदल यात्रियों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। दिल्ली सरकार ने अपने एक्शन प्लान के तहत ये कड़े प्रावधान पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) को सुझाए हैं।

ईपीसीए ने इन सुझावों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंप दिया है, जिस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा। क्रियान्वयन की संयुक्त जिम्मेदारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण विभाग, परिवहन विभाग, डीडीए, पीडब्ल्यूडी, सीपीडब्ल्यूडी, ईपीसीए, यातायात पुलिस, नगर निगम डीएसआइआइडीसी, दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम, सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रलय, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रलय और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की होगी।

दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के लिए पर्यावरण विभाग ने 42 सूत्रीय दीर्घकालिक एक्शन प्लान तैयार किया है। यह प्लान मूल रूप में वर्ष 2012 में शीला दीक्षित सरकार के कार्यकाल में बनाया गया था, अब इसमें कुछ संशोधन किए गए हैं। पर्यावरण विभाग ने इसे ईपीसीए को सौंप दिया है।

प्लान को दस हिस्सों में बांटा गया है। हर हिस्से में चार से पांच प्रस्ताव हैं। ईपीसीए ने दिल्ली का यह प्लान अपने दीर्घकालिक एक्शन प्लान के साथ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सुपुर्द कर दिया है। सीपीसीबी इन दोनों एक्शन प्लान और अपने दीर्घकालिक एक्शन प्लान को मिलाकर दिल्ली-एनसीआर के लिए एक समग्र एक्शन प्लान तैयार करेगा। आंशिक बदलाव समूचे एनसीआर यानि दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में लागू होगा।

एक्शन प्लान में और भी कड़े उपाय किए गए हैं शामिल

-सड़कों पर साइकिल और पैदल यात्रियों का रखा जाएगा पूरा ख्याल

-हिस्सों में बांटा गया दिल्ली का एक्शन प्लान

-वायु गुणवत्ता निगरानी

-वाहनों से निकलने वाला धुआं कम करना

-सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करना

-नॉन मोटराइज्ड वाहनों का नेटवर्क तैयार करना

-जाम और प्रदूषण कम करने के लिए पार्किंग नीति बनाना

-दिल्ली की सभी सीमाओं पर माल वाहनों की सख्ती से जांच

-दिल्ली परिवहन निगम के जीर्णोद्धार के साथ-साथ कॉमन टिकटिंग व्यवस्था लागू की जाएगी1’गैस से चलने वाले ऊर्जा संयंत्रों में नाइट्रोजन ऑक्साइड के मानकों का सख्ती से पालन होगा

-जनरेटर सेट का प्रयोग सीमित किया जाएगा। मोबाइल टावरों में भी बिजली के वैकल्पिक प्रबंध किए जाएंगे

-फ्लाई ऐश का 100 फीसद प्रयोग सुनिश्चित होगा। इसका इस्तेमाल फुटपाथ की टाइल और सड़कों या पटरियों की मरम्मत में किया जाएगा

-सड़कों पर मशीनों से सफाई होगी और झाड़ू से सफाई करते हुए पहले पानी का छिड़काव होगा

- बस कॉरीडोर अलग होगा

-हरित क्षेत्र का एरिया बढ़ाया जाएगा

दिल्ली में प्रदूषण रोकने की कवायद

राजधानी की आबोहवा को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में की जा रही कवायद से मंगलवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल रूबरू हुए। राजनिवास में आयोजित एक बैठक के दौरान उन्होंने तैयारियों की समीक्षा की और दिल्ली की सड़कों पर चलने वाले 15 वर्ष पुराने वाहनों को हटाने के लिए केंद्रीय मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव अंतरराज्यीय बसों के रूटों पर तथा अलग-अलग इलाके में बस स्टॉप बनवाएं, जिससे लोगों को आवागमन में सहूलियत हो। उपराज्यपाल ने लोक निर्माण विभाग व स्थानीय निकायों को सड़कों पर जमा धूल व मलबे को हटाने का आदेश दिया।

उन्होंने कहा कि वायू प्रदूषण में यह बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि अप्रैल से जुलाई तक सड़कों की सफाई में मैकेनिकल स्वीपिंग मशीन का अधिक से अधिक इस्तेमाल हो।

उपराज्यपाल ने कहा कि सड़क किनारे पड़ी धूल भी प्रदूषण करती है। इसको कम करने के लिए सड़क के बीच के भागों में हरियाली विकसित की जाए। व्यवसायिक भवनों के निर्माण में भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के आधार पर निश्चित रूप से फ्लाइ एश और फ्लाइएश ईंट का प्रयोग सुनिश्चित हो।

प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों के खिलाफ अभियान शुरू करने तथा कचरा जलाने वालों के खिलाफ संबंधित विभाग व एजेंसियों को कार्रवाई करने को कहा गया।

उपराज्यपाल ने सभी एजेंसियों को निर्देश दिए कि वह अपनी कोशिश जारी रखें और लंबे समय के समाधान के लिए एक योजना बनाएं, जिससे दिल्ली का प्रदूषण कम हो सके।

Posted By: JP Yadav

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