नई दिल्ली [नेमिष हेमंत]। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी मंत्र 'लोकल के लिए वोकल' के आह्वान पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) ने गांवों में रोजगार पैदा करने की योजना तैयार की है। इस योजना को अभियान के तौर पर लागू करने के लिए संघ का आनुषांगिक संगठन स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) श्रमिकों, किसानों, उद्यमियों, शिक्षाविद, तकनीक के जानकार, उद्योग व व्यापार जगत के प्रतिनिधियों सहित सभी संबंधित लोगों को लेकर जिलास्तर पर समितियों का गठन करेगा। इसके साथ ही स्वदेशी अनुसंधान व तकनीक को धार देने की कोशिश होगी।

स्वदेशी के मॉडल में गांवों को शिल्प और कृषि आधारित उत्पाद से स्वावलंबी बनाने की मुहिम होगी। इनमें खाद्य प्रसंस्करण, मुर्गी पालन, डेयरी, मछली पकड़ने, मशरूम, बांस व फूलों की खेती, बागवानी समेत अन्य शामिल हैं। इनके लिए जरूरी तकनीक, कच्चा माल और बाजार की उपलब्धता के लिए सरकार के साथ सभी संबंधित लोगों से मदद ली जाएगी। ग्रामीणों को प्रोत्साहित करने के लिए सफल लोगों की कहानी बताई जाएगी।

वहीं, विनिर्माण क्षेत्र में जिला स्तर पर औद्योगिक समूहों की पहचान की जाएगी। देश में मौजूद 700 से अधिक सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग (एमएसएमई) क्लस्टर को फिर से खड़ा करने पर जोर होगा जो चीन से अनियंत्रित आयात के कारण अच्छी स्थिति में नहीं है। इसके लिए कई क्लस्टरों का अध्ययन भी किया गया है।

वहीं, भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) गांव पहुंच रहे मजदूरों का डाटा तैयार कर उन्हें स्थानीय उद्योग में रोजगार उपलब्ध कराने समेत अन्य मदद करेगा।

एसजेएम के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्वनी महाजन ने कहा कि स्वदेशी का मॉडल गांवों से ही निकलेगा, अगर आजादी बाद देश में विकेंद्रीकरण की संकल्पना पर आधारित उद्योग तैयार किए गए होते तो आज मजदूरों की यह दर्दनाक तस्वीर सामने नहीं होती।

बता दें कि कोरोना वायरस ने एक सबक तो जरूर दिया है कि आत्मनिर्भरता देश के विकास के लिए बेहद जरूरी है और भविष्य में हम ऐसे लड़ाई के लिए भी तैयार हो पाएंगे।

Posted By: JP Yadav

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