नई दिल्ली [नेमिष हेमंत]। Coronavirus PPE kit: वैश्विक महामारी कोरोना से बचाव के इंतजाम में लोगों को धोखाधड़ी का सामना करना पड़ रहा है। धोखाधड़ी के स्तर का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दवा व मेडिकल उपकरण के थोक बाजार भागीरथ पैलेस में पीपीई किट रेहड़ी-पटरी वालों से भी मिल जा रहा है और इसका दाम भी फुटपाथ पर बिकने वाले एक टी-शर्ट के बराबर है। ये 100 रुपये से 150 रुपये में उपलब्ध है।

पीपीई किट के साथ अहम शर्त है कि यह किटाणु रहित होना चाहिए, जबकि फुटपाथ पर ये किट धूल के साथ लोगों के थूक से निकलने वाले विषाणुओं को भी झेल रहे हैं। मात्र रेहड़ी-पटरी वाले ही नहीं, कई दुकानों से पीपीई किट के नाम पर यह फर्जीवाड़ा जारी है। दुकानों पर पीपीई किट भी महज 90 रुपये से 300 रुपये तक में उपलब्ध है। हालांकि, दुकानदार किट की गुणवत्ता को लेकर सवाल किए जाने पर किट देने से इंकार कर देते हैं। फुटपाथ से लेकर दुकानों पर पीपीई किट के नाम पर ऐसे कपड़े और प्लास्टिक के उत्पाद बेचे जा रहे हैं, जो किसी भी मानक पर खरे नहीं उतरते हैं। चिंतित करने वाली बात यह कि जानकारी के अभाव में इसे लोग बड़े पैमाने पर खरीद भी रहे हैं। लॉकडाउन-4 में बाजारों और फैक्टि्रयों के साथ कार्यालयों को खोल दिए जाने के बाद निजी खरीदारों में पीपीई किट की मांग बढ़ी है तो उसी हिसाब से इसके नाम पर फर्जीवाड़ा भी शुरू हो गया है।

भागीरथ पैलेस में मेडिकल उपकरण बेचने वाले एक दुकानदार नाम न छपने की शर्त पर बताते हैं कि बाजार में ऐसे-ऐसे लोग भी पीपीई किट लेकर आते हैं जो पहले परिधान तैयार करने की छोटी यूनिट चलाते थे। अब वह प्लास्टिक व सामान्य कपड़ों से तैयार परिधान पीपीई किट के नाम पर बाजार में खपाने की कोशिश करते हैं। बहुत से दुकानदार इसे थोक में खरीदते हैं और लाभ लेकर बेच रहे हैं।

फुटपाथ पर पीपीई किट बेचने वाले ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह 120 रुपये के प्रति किट के दाम में रोजाना 15 से 30 पीपीई किट बेच ले रहा है। उसने बताया कि एक कपड़ा सिलने वाला उसे थोक में ये किट उपलब्ध कराता है, जिसमें हेड कवर, शू कवर के साथ ग्लब्स भी है।

दिल्ली ड्रग टेडर्स एसोसिएशन के सचिव आशिष ग्रोवर कहते हैं कि दिक्कत यह है कि दुकानदारों के पास पीपीई किट जांचने का कोई साधन नहीं है। इसे लेकर दुकानदारों में जागरुकता का अभाव भी है। इसे लेकर संबंधित नियामक सरकारी एजेंसी व दिल्ली पुलिस को संज्ञान लेना चाहिए।

एन 95 मॉस्क और सैनिटाइजर के नाम पर भी फर्जीवाड़ा

इतना ही नहीं एन 95 मॉस्क के साथ ही सैनिटाइजर के नाम पर भी जमकर फर्जीवाड़ा हो रहा है। लोग कोरोना से डरे-सहमें हैं और इसी का दुकानदार फायदा उठा रहे हैं। एन-95 के नाम पर सामान्य मास्क बेचे जा रहे हैं। इसी तरह मानक पर खरे नहीं उतरने वाले सैनिटाइजर बेचे जा रहे हैं। 

Posted By: JP Yadav

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