नई दिल्ली, जेएनएन। कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित के बिजली बिल को लेकर आरोपों को ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि 2010 में जब दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी, तब एक किलोवाट के मीटर पर 50 यूनिट का 153 रुपये भुगतान करना पड़ता था। वही बिल 2013 में 264 हो गया। इस तरह शीला दीक्षित की सरकार में तीन साल के अंदर 73 फीसद बिजली के दाम बढ़ाए गए।

आज दिल्ली में 50 यूनिट के लिए मात्र 128 रुपये भुगतान करना पड़ता है, जोकि शीला सरकार के समय से लगभग आधा है। इसी प्रकार 100 यूनिट तक के लिए शीला दीक्षित की सरकार के समय 485 रुपये भुगतान करना पड़ता था। आज मात्र 211 रुपये भुगतान करना पड़ता है। अर्थात पुराने सभी आंकड़ों को वर्तमान सरकार के आंकड़ों से मिलान किया जाए तो यह साबित होता है कि शीला सरकार के समय की तुलना में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार में दिल्ली की जनता को बिजली लगभग आधे दामों पर मुहैया कराई जा रही है।

सतेंद्र जैन ने कहा कि जिस रफ्तार से शीला की सरकार में बिजली के दाम बढ़ाए गए थे, अगर उसी रफ्तार से आज भी बिजली के दाम बढ़े होते तो जो बिल आज 50 यूनिट के लिए 128 रुपये है, वह 760 रुपये हो जाता। इस हिसाब से अभी 632 रुपये महीने की बचत हो रही है। जैन ने कहा है कि बैठक के दौरान जब हमने कांग्रेस के नेताओं से उनकी पार्टी शासित राज्यों में बिजली के दाम कम कराने को कहा तो उन्होंने यह कह कर नकार दिया कि वह हमारे हाथ में नहीं है।

बिजली मंत्री ने इस मामले से पर्दा उठाते हुए कहा कि दिल्ली मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से बिजली खरीदती है। परंतु उन्हीं राज्यों में दिल्ली के मुकाबले तीन गुना महंगे दामों पर वहां की जनता को बिजली उपलब्ध कराई जाती है। जैन ने कहा कि पिछली सरकारों में प्रतिवर्ष बिजली के दाम बढ़ाए जाते थे, जबकि आप की सरकार आने के बाद एक बार भी दिल्ली में बिजली के दाम नहीं बढ़े हैं।

10 साल पहले दिल्ली के अंदर बिजली की जो स्थिति थी उसके मुकाबले आज दिल्ली में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। सौरभ भारद्वाज ने ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस द्वारा जारी सूचना झूठी है। जब मुख्यमंत्री ने शीला दीक्षित से कथित घोटाले के बारे में पूछा तो उनका कहना था कि वे विवरण के साथ तैयार नहीं हैं।

आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने बताया कि दिल्ली में बिजली के दामों को लेकर शीला दीक्षित ने मुख्यमंत्री केजरीवाल से मिलने का समय मांगा था। केजरीवाल ने तुरंत प्रभाव से शीला दीक्षित से मुलाकात की। मगर जब शीला दीक्षित दिल्ली की मुख्यमंत्री थीं, तब केजरीवाल ने बिजली के दामों को लेकर एक बड़ा आंदोलन किया था। लगभग 10 लाख लोगों ने बिजली के दामों के खिलाफ पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया था। जब 10 लाख पत्र लेकर केजरीवाल शीला दीक्षित के घर पहुंचे, तो उनके एक सहयोगी ने यह कहकर लौटा दिया कि मुख्यमंत्री जी सो रही हैं।

उन्होंने बताया कि मुलाकात के दौरान जब मुख्यमंत्री ने शीला दीक्षित से पूछा कि आप बिजली के दामों को लेकर जो आंकड़े लाई हैं उसका आधार क्या है? तो शीला दीक्षित ने पलटकर हारून यूसुफ की तरफ देखा, उनके पास भी जवाब नहीं था। उन्होंने भी पलटकर देवेंद्र यादव की ओर देखा और देवेंद्र यादव ने लिलोठिया की तरफ देखा।

बता दें कि बुधवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित के नेतृत्व में वरिष्ठ पार्टी नेताओं ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से उनके आवास पर मुलाकात की थी। इस मुलाकात में बिजली बिल से फिक्स और पेंशन फंड चार्ज हटाने सहित बिजली कटौती और पेयजल किल्लत के समाधान के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने की मांग की गई थी।

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Posted By: Mangal Yadav