दिल्ली-NCR में सिर्फ 3% ट्रक-बस फैला रहे 36% प्रदूषण, EV में बदलना ही रास्ता; TERI की रिपोर्ट में खुलासा
एनसीआर में कुल वाहनों के केवल तीन प्रतिशत होने के बावजूद, ट्रक और बसें वायु प्रदूषण में 36% तक योगदान ...और पढ़ें

सभी ट्रकों और बसों को ईवी में बदलना ही एकमात्र रास्ता। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
ट्रक और बसें एनसीआर प्रदूषण में 36% योगदान करती हैं
कुल वाहनों का केवल तीन प्रतिशत हैं ये भारी वाहन
इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलाव ही प्रदूषण कम करने का उपाय
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। एनसीआर में हवा की गिरती गुणवत्ता हमेशा से एक गंभीर चिंता का विषय रही है। प्रदूषण के तमाम कारकों के बीच चौंकाने वाला तथ्य यह है कि एनसीआर की आबोहवा को खराब करने में भारी वाहनों की हिस्सेदारी सबसे घातक है।
द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TER) की एक रिपोर्ट के अनुसार, एनसीआर के कुल वाहन प्रदूषण में ट्रकों और बसों की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि ये भारी वाहन क्षेत्र के कुल वाहनों की संख्या के महज तीन प्रतिशत ही हैं।
कम संख्या, मगर सबसे ज्यादा मार
यातायात विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों के लिए ये आंकड़े आंखें खोलने वाले हैं। आंकड़ों के अनुसार, एनसीआर में सड़कों पर दौड़ने वाले कुल वाहनों में ट्रकों और बसों की संख्या बहुत कम है, लेकिन डीजल के अत्यधिक इस्तेमाल और इंजन पुराने होने के कारण इनसे निकलने वाला धुआं सबसे ज्यादा जहरीला है।
यह तीन प्रतिशत वाहन मिलकर एनसीआर के वायुमंडल में एक तिहाई से ज्यादा प्रदूषण घोल रहे हैं, जो सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य और सांसों पर भारी पड़ रहा है।
इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलाव ही एकमात्र रास्ता
इस गंभीर संकट से निपटने के लिए पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अब पारंपरिक ईंधन (डीजल) पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने का समय आ गया है।
सेंटर फाॅर साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) की कार्यकारी निदेशक अनुमिता राय चौधरी का स्पष्ट कहना है कि सरकार के निर्णय के अनुरूप यदि इन कमर्शियल ट्रकों और बसों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक (ईवी) में बदल दिया जाए, तो एनसीआर को इसका सीधा और बड़ा लाभ मिलेगा।
क्या होंगे इसके फायदे?
- पीएम 2.5 और पीएम 10 में कमी: इलेक्ट्रिक बसें और ट्रक सड़कों पर उतरने से हवा में तैरने वाले हानिकारक कणों के स्तर में भारी गिरावट आएगी।
- कार्बन उत्सर्जन पर लगाम: दिल्ली सहित एनसीआर में सर्दियों के दौरान बनने वाले स्माग की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।
- आर्थिक और नीतिगत सुधार: हालांकि भारी वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन मजबूत नीति, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और सरकारी सब्सिडी के जरिये इसे मुमकिन बनाया जा सकता है।
जागरण मत
एनसीआर को गैस चैंबर बनने से रोकने के लिए अब छोटे वाहनों के साथ-साथ भारी व्यावसायिक वाहनों पर ध्यान केंद्रित करना भी अनिवार्य हो गया है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट (बसों) और माल ढुलाई (ट्रकों) को इलेक्ट्रिक में बदलना अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि स्वच्छ भविष्य के लिए एक जरूरी कदम बन चुका है। केंद्र सरकार के निर्णय के बाद अब इसे पूरी इच्छाशक्ति के साथ जल्द से जल्द ईवी में बदला जाना चाहिए।
