नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। राजधानी में दिवाली से पहले ही प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। प्रदूषण का स्तर शुक्रवार दोपहर को भी खतरनाक स्तर से अधिक हो गया। कई स्थानों पर पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 तथा पीएम 10 का स्तर 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। सल्फर डाईऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे प्रदूषक तत्वों की मात्रा भी सामान्य से काफी अधिक थी।

बढ़ते प्रदूषण को लेकर सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वॉयरमेंट (सीएसई) ने भी चिंता जताई है। सीएसई की कार्यकारी निदेशक अनुमिता राय चौधरी फेसबुक लाइव के जरिये लोगों से जुड़ीं और पटाखे न जलाने की अपील की। उन्होंने कुछ लोगों के सवालों के जवाब भी दिए। अनुमिता ने कहा कि थोड़ा और सर्दी पड़ने पर प्रदूषण की स्थिति और खराब हो जाएगी।

दिल्ली में बदला मौसम, तापमान बढ़ते ही कम हो गया प्रदूषण का स्तर

सीएसई के मुताबिक 2.5 माइक्रो आकार के कणों की संख्या सितंबर की अपेक्षा अक्टूबर में दोगुनी हो गई है। सितंबर में किसी दिन प्रदूषण की स्थिति खतरनाक नही थी, लेकिन अक्टूबर में प्रदूषण का स्तर दिन में 27 फीसद खराब रहा और 57.7 फीसद बहुत खराब रहा, जबकि 3.8 फीसद स्थिति खतरनाक रही। अनुमिता राय चौधरी ने कहा कि जब प्रदूषण की स्थिति पहले से ही इतनी भयावह है तो पटाखों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। पटाखों से निकलने वाले प्रदूषण के तत्व कैसर जैसी बीमारियों के कारक भी हो सकते हैं।

जागरूकता अभियान से हो रहा फायदा

सीएसई ने रिपोर्ट में कहा कि पटाखा न फोड़ने के लिए चलाए जा रहे जागरूकता अभियान से लोगों को फायदा हो रहा है। दिवाली में वर्ष 2010 में प्रदूषण का स्तर मानक से 11 गुना अधिक था, जबकि वर्ष 2013 में आठ से नौ गुना, वर्ष 2015 में घटकर पांच गुना तक आ गया है।

दिल्ली में इस हफ्ते प्रदूषण नहीं होगा कम, तापमान भी सामान्य से अधिक दर्ज

मिट्टी से लेकर फसल तक होती है प्रदूषित

दिवाली में पटाखों से निकलने वाले हानिकारक रसायनों से न केवल हवा बल्कि मिट्टी, सब्जियां, फसल, पानी बल्कि फूड चेन के माध्यम से अंतत: हम प्रभावित होते हैं। जिस तरह से आवाज करने वाले पटाखे हानिकारक हैं, उसी तरह आवाज न करने वाले पटाखे भी हानिकारक हैं क्योंकि उनमें भी सल्फर डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड सहित कई हानिकारक तत्व होते हैं।

Edited By: Amit Mishra