नई दिल्ली,  जागरण संवाददाता। Jamia violence case:  राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर ((National Register of Citizens) और नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship (Amendment) Act, 2019) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान जामिया मिल्लिया इस्लामिया के आसपास हुई हिंसा की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने की मांग का दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में विरोध किया। बुधवार को पुलिस की तरफ से यह आपत्ति जामिया हिंसा से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर मुख्य न्यायमूर्ति डीएन पटेल व न्यायमूर्ति प्रतीक जालान के समक्ष सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने पेश किए। इससे पहले मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान छात्रों के अधिवक्ता ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच करने की मांग की थी।

बचाव पक्ष की दलीलों पर अमन लेखी ने कहा कि याचिका का कोई आधार नहीं है और मांगी गई राहत नहीं दी जा सकती क्योंकि मामले में आरोप पत्र दाखिल हो चुका है। जामिया में पुलिस के घुसने पर उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर शैक्षिक संस्थान व विश्वविद्यालय में प्रवेश से पुलिस को नहीं रोका जाता है।

वहीं, घायल छात्रों को मुआवजा देने के मामले में उन्होंने कहा कि अस्पताल में छात्रों के भर्ती होने पर अभी सवाल है और मामले की जांच अब भी चल रही है। उन्होंने कहा कि इस याचिका को खारिज कर देना चाहिए। पीठ ने अमन लेखी की बहस सुनने के बाद सुनवाई को 14 अगस्त के लिए स्थगित कर दिया।

गौरतलब है कि दक्षिण दिल्ली के कई इलाकों में पिछले साल दिसंबर महीने में हुई हिंसा के दौरान कई गाड़ियों में आग लगा दी गई थी। इसी के साथ कई लोग घायल भी हुए थे। वहीं, इसके बाद 24-25 फरवरी को उत्तर पूर्वी दिल्ली में सीएए और एनआरसी के विरोध में हुई हिंसा में 50 से अधिक मारे गए थे तो सैकड़ों की संख्या में लोग घायल भी हुए थे।

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस