नई दिल्ली, जागरण डिजिटल डेस्क। अपनी शायरी और कविताओं के साथ-साथ अलग अंदाज के लिए मशहूर देश के जाने-माने कवि कुमार विश्वास भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी एवं क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह को श्रद्धांजली देने के लिए शनिवार को जलियांवाला बाग पहुंचे। यहां पर कुमार विश्वास वे अपने अलग अंदाज में शहीद उधम सिंह को याद किया।

पंजाब के जलियांवाला बाग पहुंचे कुमार विश्वास ने इस बाबत उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया है। 'बंदे मातरम दोस्त, मैं इस समय खड़ा हुआ हूं ऐसी पवित्र जगह पर जो भारतीय स्वाधीनता संग्राम का एक अमर तीर्थ है। पूरी दुनिया में बलिदान का सबसे बड़ा महापर्व और सबसे बड़ा मंगल मेला, जिसने ब्रिटिश अहंकार को आईना दिखाया जलियांवाला बाग। मेरे ठीक पीछे है वही स्मारक जो अमर मृत आत्माओं की याद दिलाता है, जिनका बदला लेने के लिए 21 वर्ष की प्रतीक्षा के बाद शहीद-ए-आजम उधम सिंह ने लंदन जाकर इस हत्याकांड के खलनायक जनरल डायर को मौत के घाट उतारा... मदन लाल ढींगड़ा के बाद वह दूसरे भारतीय थे, जिन्हें विदेश में फांसी दी गई थी।' कुमार विश्वास ने अपने वीडियो जगदंबा प्रसाद मिश्र की कविता की इन पंक्तियों को 'शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,वतन पर मरने वालों का यही बांकी निशां होगा' को भी पढ़ा।

गौरतलब है कि उधम सिंह ने जलियांवाला बाग कांड के समय पंजाब के गर्वनर जनरल रहे माइकल ओ' ड्वायर को 21 साल के लंबे इंतजार के बाद लंदन में जाकर गोली मारी थी। इस दोष में उन्हें 31 जुलाई 1940 को  पेंटनविले जेल में फांसी दे दी गई, जो लंदन में स्थित है।  उत्तराखंड के एक जिले का नाम भी इनके नाम पर यानी उधम सिंह नगर रखा गया है।

लंदन जाकर मारी थी जनरल डायर को गोली

यहां पर बता दें कि स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी एवं क्रांतिकारी उधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के संगरूर जिले के सुनाम गांव में हुआ था। उधम सिंह के बचपन का नाम शेर सिंह था। 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन जलियांवाला बाग में लोगों पर जनरल डायर ने गोलियां चलवाई थी, जिससे पूरे भारत में आक्रोश का माहौल था। 21 साल के लंबे इंतजार के बाद उधम सिंह ने जलियांवाला बाग नरसंहार को अंजाम देने वाले जनरल डायर को उसके देश में घुसकर गोली मारी थी।

बता दें कि जलियांवाला बांग नरसंहाल से उधम सिंह इस कदर क्रोधित थे कि जलियांवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर माइकल ओ डायर को सबक सिखाने की प्रतिज्ञा ले ली थी। इसके बाद उधम सिंह ने अफ्रीका, नैरोबी, ब्राजील और अमेरिका की यात्रा की और वर्ष 1934 में उधम सिंह लंदन पहुंचे और वहां 9, एल्डर स्ट्रीट कमर्शियल रोड पर रहने लगे। हत्या को अंजाम देने के लिए एक रिवॉल्वर भी खरीद ली थी।

जलियांवाला बाग नरसंहार के 21 साल बाद 13 मार्च 1940 को लंदन की रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी के हाल में एक बैठक थी, जहां माइकल ओ डायर भी वक्ताओं में से एक था। इस दौरान उधम सिंह उस बैठक में एक मोटी किताब में रिवॉल्वर छिपाकर पहुंचे। बैठक के बाद दीवार के पीछे से उधम सिंह ने माइकल ओ डायर पर गोलियां दाग दीं। 2 गोलियां माइकल ओ डायर को लगीं जिससे उसकी तत्काल मौत हो गई।

इस दौरान गोली मारने के बाद उधम सिंह ने वहां से भागने की कोशिश नहीं की और अपनी गिरफ्तारी दे दी। उन पर मुकदमा चला और 4 जून 1940 को उधम सिंह को हत्या का दोषी ठहराया गया। इसके बाद 31 जुलाई को उन्हें फांसी दे दी गई।

Edited By: Jp Yadav