नई दिल्ली, जेएनएन। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर हालात लगातार खराब हो रहे हैं, इसके लेकर जहां दिल्ली सरकार के साथ स्थानीय प्रशासन चिंतित है, वहीं पीएमओ ने भी तत्काल उचित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

ईपीसीए ने सौंपी रिपोर्ट,पड़ोसी राज्यों में न जलाया जाए कूड़ा
पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण एवं संरक्षण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने सुप्रीम कोर्ट से हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया है कि उनके क्षेत्रों में कोई कूड़ा नहीं जलाया जाए और चिमनियों से निकलने वाले धुएं की सख्त निगरानी की जाए। शुक्रवार को कोर्ट को सौंपी एक रिपोर्ट में ईपीसीए ने कहा कि इन इलाकों में अत्यधिक प्रदूषण वाले और खाली स्थानों पर भारी मात्र में प्लास्टिक, औद्योगिक एवं अन्य कूड़ा डालने और जलाने के मामले मिले हैं।

ईपीसीए ने रिपोर्ट में कहा है, सुप्रीम कोर्ट तीनों राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डो को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दे सकती है कि उनके इलाके में कोई कूड़ा नहीं जलाया जाए और वे कूड़े के अंबार को शोधित करने या उसे नष्ट करने के तरीके खोजें। इन अत्यधिक प्रदूषण वाले इलाकों में कई उद्योग काला धुआं उत्सर्जित कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हवा में तैरते बारीक कण (पीएम), नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर ऑक्साइड के लिए कुछ मानदंड हैं।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि तीनों प्रदूषण नियंत्रण बोर्डो को उत्सर्जन की सख्ती से एवं विशेष रूप से रात में निगरानी करने की जरूरत है। वहीं नियमों का अनुपालन नहीं करने वाले उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। रिपोर्ट में ईपीसीए ने इस बात का जिक्र किया है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड निर्माण स्थलों पर धूल से निपटने के लिए बिल्डरों को दंडित कर रहे हैं।

हालांकि इन दंडात्मक कार्रवाइयों के बावजूद बिल्डर अपनी गतिविधियों में सुधार नहीं कर रहे हैं। वे प्रदूषण की अनदेखी करना जारी रखे हुए हैं। ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्डो को लगाए गए जुर्माने पर स्थिति रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा जा सकता है जिसमें उल्लंघन करने वालों के नामों का भी उल्लेख हो।

दिल्ली सरकार ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और अन्य एजेंसियों के नियंत्रण वाली सड़कों एवं क्षेत्रों से भवन निर्माण सामग्री एवं मलबा और अन्य अपशिष्ट पदार्थो को हटाने में विफल संबंधित कार्यकारी अभियंताओं की तनख्वाह में कटौती करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय दिल्ली के मुख्य सचिव विजय देव की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया।

बैठक में शामिल एक अधिकारी ने कहा, तय किया गया है कि पीडब्ल्यूडी और अन्य एजेंसियों के जो भी कार्यकारी अभियंता अपने नियंत्रण वाली सड़कों और क्षेत्रों से मलबा हटाने में लापरवाह हैं, उन्हें व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उनकी तनख्वाह से उपयुक्त कटौती की जाएगी ताकि यह स्पष्ट संदेश जाए कि ऐसी स्थिति में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्य सचिव ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को उसके अधिकार क्षेत्रों में आने वाले इलाकों में अवैध रूप से मलबा डालने के लिए जिम्मेदार निजी एवं सरकारी एजेंसियों पर जुर्माना लगाने का निर्देश भी दिया। डीपीसीसी निजी और सरकारी एजेंसियों पर पहले ही 12.5 करोड़ रुपये जुर्माना लगा चुकी है।

सभी 13 हॉट स्पॉट पर निगरानी करने का निर्णय

बैठक में राजधानी में ज्यादा वायु प्रदूषण के लिए चिह्नित किए गए 13 हॉट स्पॉट पर तुरंत निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया गया। अगर यहां कचरे का ढेर लगा है तो उसे भी 24 घंटे के भीतर हटाने व दिन रात पेट्रोलिंग करने का आदेश दिया गया। 60 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें कितनी कारगर हैं इसकी समीक्षा की जानी चाहिए।

मैदान से मलबा न उठाने पर नाराज हुए पर्यावरण मंत्री कैलाश गहलोत
आनंद विहार टर्मिनल और कड़कड़डूमा मेट्रो स्टेशन के नजदीक डीडीए की जमीन पर पड़ा मलबा दिल्ली सरकार और डीडीए के बीच विवाद का विषय बन गया है। बृहस्पतिवार को दिल्ली के पर्यावरण मंत्री कैलाश गहलोत ने इस निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था। जिसमें उन्होंने पाया था कि आनंद विहार टर्मिनल और कड़कड़डूमा मेट्रो स्टेशन के पास, डीडीए के स्वामित्व वाली साइट पर बड़ी मात्र में मलबा पड़ा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को निर्देश दिए कि 24 घंटे के भीतर कड़कड़डूमा मेट्रो स्टेशन के निकट 10 एकड़ की जमीन से मलबा नहीं हटाया जाता है तो डीडीए उपाध्यक्ष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।

शुक्रवार को इस पर डीडीए की ओर से कहा गया है कि डीडीए सिर्फ जमीन का स्वामित्व रखती है। मलबा फेंकने वालों पर नजर रखना डीडीए का काम नहीं है। बावजूद इसके डीडीए की ओर से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड को पत्र लिखकर उक्त जमीन पर मलबा फेंकने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है।

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Posted By: JP Yadav

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