नई दिल्ली [राकेश कुमार सिंह]। PFI News: पिछले कई वर्षों से देश का माहौल बिगाड़ने में जुटे पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआइ), आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन के नक्शे कदम पर जा रहा था। दो साल पहले नागरिकता संशोधन कानून को लेकर भारत सरकार के खिलाफ दिल्ली में महीनों तक प्रदर्शन करने और उत्तर-पूर्वी जिले में भीषण हिंसक दंगे कराने में पीएफआइ की भूमिका ने गृह मंत्रालय को हैरान कर दिया था।

यूपी व राजस्थान के दंगों व केरल में हत्या में भी पीएफआइ की भूमिका ने यह साबित कर दिया था कि यह संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन जैसे देश विरोधी काम करना शुरू कर दिया है। उसी के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल व खुफिया जानकारी जुटाने वाले स्पेशल ब्रांच, आइबी समेत तमाम केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर पीएफआइ की कुंडली खंगालने में जुट गई थी।

सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि पीएफआइ पर प्रतिबंध लगने से अब राष्ट्रद्रोही हरकतों में कमी आएगी। उनका कहना है कि देश में राष्ट्र द्रोही हरकतों के लिए ही सन 1994 में पीएफआइ का गठन हुआ था। सिमी इससे पहले से सक्रिय था। सिमी के कई ब्लास्ट में नाम आने पर जब सरकार ने सन 2000 में इस पर प्रतिबंध लगा दिया, तब उस संगठन में शामिल जेहादी मानसिकता वाले सदस्यों ने इंडियन मुजाहिद्दीन नाम से नया आतंकी संगठन बना लिया था और कम सक्रिय सदस्य पीएफआइ में शामिल हो गए थे।

सिमी पर प्रतिबंध के बाद पीएफआइ ने देश में तेजी से जड़े जमाना शुरू कर दिया था। 20-22 वर्ष में यह संगठन कई राज्यों में मुस्लिम समुदाय का हितैषी बनकर उन्हें एकजुट करने व रोजगार परक नि:शुल्क शिक्षा देने के नाम पर युवाओं को भड़काता रहा। उनके दिमाग में देश के प्रति जहर घोलकर उन्हें जेहादी बनाने में जुटा रहा।


दिल्ली व जम्मू कश्मीर समेत देश के कई राज्यों में आतंकी आपरेशन को लीड करने में शामिल स्पेशल सेल के डीसीपी प्रमोद सिंह कुशवाहा का कहना है कि इंडियन मुजाहिद्दीन ने देशभर में तेजी से बम धमाका करना शुरू कर दिया था। अहमदाबाद, पुणे, गुजरात, हैदराबाद व बनारस के मंदिर में धमाके करने के बाद 2008 में आइएम ने जब दिल्ली में सीरियल ब्लास्ट को अंजाम दिया तब स्पेशल सेल को पहली बार जानकारी मिली कि देशभर में हुए धमाके को आइएम ही अंजाम दे रहा है।

उसके बाद स्पेशल सेल ने आइएम के सदस्यों को दबोचने के लिए विशेष आपरेशन शुरू किया था। उस समय के तत्कालीन विशेष आयुक्त एसएन श्रीवास्तव के नेतृत्व में सेल ने 2008 से 2013 तक आइएम के 60 से अधिक आतंकियों को दबोच कर संगठन की कमर तोड़ दी थी। कुछ आतंकी मुठभेड़ में मारे भी गए थे। 15 आतंकी देश छोड़ पाकिस्तान भाग गए थे, जिनमें आठ आतंकी बाद में सीरिया चले गए।

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वहां उन्होंने आइएस व अन्य संगठन ज्वाइन कर लिया था जो कुछ साल पहले मारे भी जा चुके हैं।सेल के अधिकारी का कहना है कि कुछ दशक पहले दक्षिण भारत के तीन-चार संस्थाओं के सदस्यों ने ही मिलकर सिमी व पीएफआइ का गठन राष्ट्र विरोधी हड़कतों के लिए किया था। सिमी के बाद आइएम के भी खत्म हो जाने पर अब लंबे समय से पीएफआइ ही देश में अपनी नापाक हरकतों को अंजाम देने में जुटा हुआ था।

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Edited By: Vinay Kumar Tiwari

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