नई दिल्ली (नेमिष हेमंत)। पुरानी दिल्ली इस समय इत्र से महक रही है। रमजान माह में लोग इसका विशेष तौर पर प्रयोग करते हैं। इस वजह से चांदनी चौक से लेकर मटिया महल और चितली कबर में इत्र की दुकानों में विशेष रौनक दिख रही है। जामा मस्जिद इलाके में इसकी भीनी-भीनी खुशबू माहौल को खुशनुमा बना रही है। रमजान माह में नमाज पढ़ने के लिए जाने के दौरान साफ-सुथरे कपड़ों में इत्र लगाने की परंपरा है। उसमें भी इफ्तारी के कहने क्या।

ऐसे में गलियों के साथ ही जामा मस्जिद, फतेहपुरी मस्जिद समेत अन्य छोटी- बड़ी मस्जिद इत्र की खुशबू से महक रहीं हैं। दुकानदारों के मुताबिक रमजान में इत्र की मांग में तीन गुना इजाफा हुआ है। पुरानी दिल्ली में दो सौ साल से ज्यादा पुरानी इत्र की कई दुकानें हैं। विभिन्न फूलों से तैयार इत्र की खुशबू यहां से गुजरने वाले लोगों को तरोताजा कर देती है। यहां एनसीआर के साथ ही आस-पास के राज्यों से खरीदार पहुंचते हैं। चांदनी चौक में गुलाब सिंह जौहरी मल इत्र की दुकान 200 वर्ष से अधिक पुरानी है।

आठवीं पीढ़ी के कुशल नंदी के मुताबिक इत्र की मांग साल भर रहती है, लेकिन रमजान में मांग में तीन गुना तक इजाफा हो जाता है। ग्राहकों को चंपा, गुलाब, बेला, हिना, केवड़ा, मजमुआ, कदंबा, शमामा, हरसिंगार, गुलहिना व चंदन से तैयार इत्र काफी पसंद आ रहे हैं। इसमें भी जन्नत-उल-फिरदौस की बात ही अलग है। धरती पर बारिश की पहली बूंद से निकलने वाली सोंधी खुशबू वाला इत्र भी लोगों को पसंद आ रहा है।

कुशल नंदी के मुताबिक फूलों के रस से बने इत्र की कीमत 4000 रुपये प्रति दस ग्राम है और इसके ग्राहक भी खास हैं। यह इत्र दुकानदार खुद तैयार करते हैं। वहीं कन्नौज, रतलाम, कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई, लखनऊ व कानपुर के इत्र भी दिल्ली वालों को खूब पसंद आ रहे हैं।

मटिया महल में सुभान अतर हाउस के मालिक सुभान के मुताबिक इत्र के दाम में पिछले वर्ष से अंतर नहीं है। इस क्षेत्र में कुछ कंपनियां भी आ गई हैं। इसका ई-कॉमर्स कारोबार बढ़ा है। 

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