नई दिल्ली [रीतिका मिश्रा]। ज्योतिष को वेद का नेत्र कहा गया है। ये ऐसा नेत्र है जो हमें पारलौकिक जगत के दर्शन कराता है। इसलिए ये जरूरी है जब हम किसी कुंडली को देखे तो लौकिक दर्शन को न करके पारलौकिक दर्शन करे। कानपुर से वरिष्ठ ज्योतिषी और आल इंडिया एस्ट्रोलाजिकल साइंसेज (आईकास) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश चिंतक ने ये बातें राजधानी के भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) में शनिवार को शुरू हुए दो दिवसीय अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहीं। ‘‘दु:स्थान: अभिशाप या वरदान’’ विषय पर हो रहे इस सम्मेलन का आयोजन आल इंडिया एस्ट्रोलाजिकल साइंसेज (आइकास) का नोएडा चैप्टर कर रहा है।

बताया कैसे खुलेगा उन्नति का द्वार 

कुंडली के दुस्थानों पर चर्चा करते हुए चिंतक ने कहा कि छठे भाव को रोग, ऋण और रिपु का भाव कहा जाता है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के कर्म एवं वाणी ठीक रहेगी उनका छठा भाव भी ठीक रहेगा। उन्होंने कहा कि कुंडली में माला योग बनने से व्यक्ति काफी उन्नति करता है।

ऐसी विद्या है जो कर्म के लिए करती है प्रेरित

वहीं, सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एस एन कपूर ने ज्योतिष को ऐसी विद्या बताया जो लोगों को कर्म के लिए प्रेरित करती है और उन्होंने ज्योतिष का अभ्यास करने वाले लोगों से आह्वान किया कि वे लोगों को व्यर्थ में भयभीत करने के बजाय उन्हें प्रत्येक परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार करें।

इस कारण होती है लोगों को फेफड़े की परेशानी

उन्होंने कहा कि जन्म कुंडली के छठे, आठवें और बारहवें भाव को सदैव नकारात्मक भावों की तरह देखने की जरूरत नहीं है। इसमें जीवन के कुछ ऐसे कारक छिपे हैं जो आगे बढ़ने और लक्ष्य प्राप्ति में काफी मदद करते हैं। कुंडली के 12वें घर पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ये घर हर तरीके से देने का है। अगर 12वें घर का स्वामी लग्न में होगा तो व्यक्ति को फेफड़ों में परेशानी हो सकती है।

सही कर्मों के लिए जा सकता है प्रेरित

वहीं, आइकास के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईएएसस अधिकारी एबी शुक्ला ने कहा कि ज्योतिष की सहायता से पूर्व कर्मों के प्रभावों का पता लगाकर व्यक्ति को सही कर्मों के लिए प्रेरित किया जा सकता है। वहीं, उन्होंने कुंडली के द्वादश भाव में केतु के प्रभावों पर चर्चा की।

नहीं बनाएं मन में गलत धारणा

आईकास के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रदीप चतुर्वेदी ने कहा कि लोगों के मन में दुस्थानों को गलत धारणाएं हैं। जबकि यह जीवन के महत्वपूर्ण पक्षों जैसे संघर्ष, प्रतिस्पर्धा, रिसर्च, विदेश यात्रा आदि से जुड़े भाव हैं। इसलिए दुस्थानों को लेकर मन में गलत धारणाएं नहीं बनानी चाहिए।

आयु एवं आरोग्य जानने का बताया तरीका

वास्तु विशेषज्ञ पं सतीश शर्मा ने कहा कि कुंडली में छठा, आठवां और 12वां भाव बहुत ही महत्वपूर्ण होता हैं। ये व्यक्ति की आयु और आरोग्य बताता है़। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनेताओं की कुंडली में विपरीत राजयोग, नीच का चंद्रमा और दुस्थानों में राहु देखने को मिलता है।

Edited By: Prateek Kumar