यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 14, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
90 घंटे काम करना कितना सही? कॉरपोरेट में लोगों के कमर, गर्दन और घुटने कर रहे दर्द; फिजियोथैरेपिस्ट का खुलासा
लार्सन एंड टुब्रो के चेयरमैन सुब्रह्मण्यन ने कुछ दिन पहले बयान दिया कि प्रतिस्पर्धी रहने के लिए कर्मचारियों को हफ्ते ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, नोएडा। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर लार्सन एंड टुब्रो (Larsen & Toubro) के चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन का बयान काफी चर्चा में है। उन्होंने कहा था कि लोगों को सप्ताह में 90 घंटे काम करना चाहिए। इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। इसी बीच फिजियोथैरेपिस्ट अभिनव कुमार ने बताया है कि कॉरपोरेट में काम का बोझ बढ़ने के कारण लोगों की कमर और गर्दन में दर्द बढ़ गया है।
लार्सन एंड टुब्रो (Larsen & Toubro) के चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन ने कुछ दिन पहले बयान दिया था कि प्रतिस्पर्धी रहने के लिए कर्मचारियों को हफ्ते में रविवार सहित 90 घंटे काम करना चाहिए। सुब्रमण्यम ने कहा, “ईमानदारी से कहूं तो मुझे खेद है कि मैं आपसे रविवार को काम नहीं करवा पा रहा हूं। अगर मैं आपको रविवार को काम करवा पाऊं तो मुझे ज्यादा खुशी होगी, क्योंकि मैं रविवार को भी काम करता हूं।”
"घर पर छुट्टी लेने से कर्मचारियों को क्या फायदा होता है। आप घर पर बैठकर क्या करते हैं? आप अपनी पत्नी को कितनी देर तक निहार सकते हैं? पत्नियां अपने पतियों को कितनी देर तक निहार सकती हैं? ऑफिस जाओ और काम करना शुरू करो।
युवाओं की कमर और गर्दन हो रही कमजोर
दौड़भाग भरी जिंदगी के बीच कॉरपोरेट सेक्टर में काम का बोझ 20 से 40 वर्ष तक के युवाओं की कमर और गर्दन को कमजोर कर रहा है। हालात यह हैं कि जिला अस्पताल में पिछले कुछ माह में मरीजों की संख्या एक हजार से बढ़कर डेढ़ हजार तक पहुंच गई है। अस्पताल के फिजियोथैरेपी विभाग में 60 प्रतिशत मरीजों की नियमित थैरेपी हो रही है।
महिलाओं का स्वास्थ्य भी हो रहा खराब
आंकड़े बताते हैं कि रसोई में काम के दौरान खुद को स्वस्थ्य रखने की अनदेखी और ऑफिस में खड़े होकर काम करना या दिनभर घर में रहकर धूप में न घूमना भी महिलाओं के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। उनके पैर और कमर की हड्डी कमजोर होने से सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है।
शरीर के कई हिस्सों में हो रही दिक्कत
जिला अस्पताल मे फिजियोथैरेपिस्ट अभिनव कुमार ने बताया कि पीठ, कमद, गर्दन, कंधे, घुटने का दर्द मरीजों को ज्यादा दिक्कत दे रहा है। अस्पताल में महिलाएं और युवाओं की संख्या पिछले कुछ माह में बढ़ी है। युवाओं में यह दिक्कत बढ़ने के जो मुख्य कारण देखे गए हैं, उनमें कम्प्यूटर, लैपटॉप पर एक ही जगह घंटो बैठकर काम करना है।
खराब खान-पान भी समस्या
महिलाएं रसोई में काम के दौरान खुद के स्वस्थ्य पर ध्यान नहीं दे पाती हैं। इतना ही नहीं, खराब खान-पान, धूप में न टहलना, विटामिन-डी कमी, व्यायाम न करना हड्डी कमजोर होने का सबसे बड़ा कारण है। ऐसे में मरीजों को तीन फिजियोथैरेपिस्ट इलाज देते हैं।
70 रूपये की पर्ची पर मरीजों को आईएफटी और टीईएनएस आदि मशीनों से थैरेपी दी जाती है। मशीनों की खासियत है कि इनसे मरीज की मांसपेशियों में खिंचाव से दर्द, जोड़ों का दर्द और ऐंठन को कम करना व सर्जरी के बाद रिकवरी के लिए होता है।
लार्सन एंड टुब्रो की एचआर ने किया बचाव
लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) की एचआर प्रमुख सोनिका मुरलीधरन ने एसएन सुब्रह्मण्यन के बयान का बचाव करते हुए कहा, यह देखना वाकई निराशाजनक है कि कैसे हमारे एमडी, चेयरमैन, एसएन सुब्रमण्यन (एसएनएस) के शब्दों को संदर्भ से बाहर कर दिया गया, जिस वजह से गलतफहमी और अनावश्यक आलोचना हुई।
सोनिका मुरलीधरन ने आगे ये भी कहा, मैं विश्वास के साथ कह सकती हूं कि एसएनएस ने कभी भी 90-घंटे के कार्य सप्ताह के संकेत को अनिवार्यता नहीं दी है। उन्होंने लिंक्डइन पोस्ट में ये बात कही है।
