नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। द्वारका स्थिति इंदिरा गांधी अस्पताल का काम पूरा नहीं को ज्वलंत मुद्​दा नहीं बनाने की दिल्ली सरकार की दलील पर दिल्ली हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि हम कुछ दिन की पहले की स्थितियों को नहीं भूल सकते। हमारे सामने जब गंभीर रूप से बीमार लोगों को आक्सीजन और आइसीयू बेड की जरूरत थी, तब इसके अभाव में इलाज का मौका न मिलने के कारण कई लोगों ने दम तोड़ दिया। पीठ ने कहा कि जिस अस्पताल में 1241 मरीजों का इलाज हो सकता था, उसमें सिर्फ आज 80 बेड माइल्ड संक्रमण वाले मरीजों के लिए उपलब्ध हैं। महामारी की वर्तमान स्थितियों को झेलने वाले नागरिकों के अनुभव से दिल्ली सरकार को सीखना चाहिए।

पीठ ने उक्त टिप्पणियों के साथ दिल्ली सरकार को हलफनामा दायर करके बताने को कहा कि अस्पताल का निर्माण कब पूरा होना था और देरी होने का कारण क्या है। साथ ही यह भी बताएं कि परियोजना को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा नई समय सीमा क्या निर्धारित की गई है। पीठ ने कहा कि सरकार द्वारा दी जाने वाली समयसीमा वास्तविक होनी चाहिए और एक बार अदालत के समक्ष आने के बाद इसका पालन किया जाना चाहिए। पीठ ने उक्त निर्देशों के साथ सुनवाई 24 मई के लिए स्थगित कर दी। पीठ ने कहा कि पहली लहर के बाद जब स्थितियां कुछ सामान्य हुई हम खुश हो गए, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए।

सुनवाई के दौरान जब दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसल राहुल मेहरा ने कहा कि अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के मामले को ज्वलंत मुद्​दा न बनाया जाए तो पीठ ने कहा अगर हम कोरोना महामारी को अलग भी रख दें तो दिल्ली सरकार ने अस्पताल के निर्माण पर बड़ा निवेश किया है और ऐसे में यह सुविधा आम नागरिकों के लिए शुरू की जानी चाहिए।

इतना ही नहीं सामने आ रही विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार महामारी का अंत कब हाेगा ये कहना मुश्किल है, ऐसे में राज्य में चल रही परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अपने संसाधनों का उपयोग करना होगा। कोरोना महामारी की तीसरी लहर की बात हो रही है और हमें नहीं मालूम हम किन परिस्थितियों का सामना करने वाले हैं। पीठ ने कहा कि अदालत में पेश की गई तस्वीरें बताती हैं कि सुविधाएं तैयार हैं और ऐसा कोई कारण नहीं दिखाई देता कि दिल्ली सरकार परियोजना को जल्द से जल्द न पूरा करे। सुनवाई के दौरान द्वारका बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वाईपी सिंह ने पीठ को बताया कि बुधवार सुबह नौ बजे दी गई जानकारी के अनुसार इंदिरा गांधी अस्पताल में सिर्फ 80 बेड उपलब्ध हैं। वहां पर आक्सीजन और आइसीयू बेड नहीं है।

सरकार की सुस्ती के कारण नहीं पूरी हुई परियोजना

पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि अस्पताल बनाने की परियोजना सरकार की सुस्ती के कारण पूरी नहीं हुई। इस पर मेहरा ने कहा कि सरकार के स्तर पर कोई सुस्ती नहीं हुई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने वादे के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी के लिए बेड का आवंटन नहीं किया। इसके जवाब में पीठ ने कहा कि केंद्र का यहां कोई मतलब नहीं है। अस्पताल का काम समय पर पूरा करने की जिम्मेदारी राज्य की है।