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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 08, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Uphaar Cinema Fire Case: सुबूतों से छेड़छाड़ के दोषी अंसल बंधुओं को सात वर्ष जेल की सजा

By Mangal YadavEdited By:
Published: Mon, 08 Nov 2021 03:26 PM (IST)Updated: Tue, 09 Nov 2021 07:33 AM (IST)

Uphaar Cinema Fire Case पटियाला हाउस कोर्ट ने उपहार सिनेमा केस में दोषी करार दिए गए सुशील अंसल और गोपाल ...और पढ़ें

दिल्ली कोर्ट ने अंसल बंधुओं को सुनाई 7-7 साल की सजा, जुर्माना भी लगाया
दिल्ली कोर्ट ने अंसल बंधुओं को सुनाई 7-7 साल की सजा, जुर्माना भी लगाया

नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। 1997 के उपहार अग्निकांड से जुड़े सबूतों के साथ छेड़छाड़ के मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने रियल एस्टेट कारोबारी सुशील व गोपाल अंसल को सात-सात सजा के कारावास की सजा सुनाई है। चीफ मेट्रोपानिटल मजिस्ट्रेट डा. पंकज शर्मा ने यह कहते हुए अंसल बंधुओं पर 2.25-2.25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया कि कई रातों तक विचार करने के बाद अदालत इस नतीजे पर पहुंची कि दोनों दोषी जुर्माना लगाए जाने के हकदार है।

इसके अलावा अदालत ने मामले में अदालत के कर्मचारी रहे दोषी दिनेश चंद शर्मा व दो अन्य दोषी पीपी बत्रा एवं अनूप सिंह को भी सात साल की सजा सुनाई गई और सभी पर तीन-तीन लाख रुपये जुर्माना भी लगाया। मामले में दो आरोपितों हर स्वरूप पंवार और धर्मवीर मल्होत्रा की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी।

अदालत ने आठ अक्टूबर को अंसल बंधुओं समेत अन्य को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा पर जिरह के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि न्यायपालिका की नींव विश्वास और लोगों के भराेसे पर टिकी है और इस नींव को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इससे सख्ती से निपटने की जरूरत है। अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले का संबंध सिर्फ सजा से नहीं है, बल्कि इस मामले में सजा समाज की पुकार सुनकर सुनाई जानी चाहिए।

अपर्याप्त सजा न्याय प्रणाली को पहुंचाएगी नुकसान : अदालत

चीफ मेट्रोपानिटल मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा ने कहा कि अदालत गलत सहानुभूति या अनुचित उदारता जनता को संस्थागत अखंडता पर संदेह करने का मौका देगी और इसकी साख को प्रभावित करेगी। अपर्याप्त सजा न्याय प्रणाली को और अधिक नुकसान पहुंचाएगी। कानून की प्रभावशीलता में जनता के विश्वास को कमजोर करेगी क्योंकि समाज न्याय प्रणाली पर इस तरह के हमलों को लंबे समय तक सहन नहीं करेगा।

यह है मामला

शिकायतकर्ता उपहार अग्निकांड पीड़ित एसोसिएशन की चेयरपर्सन नीलम कृष्णमूर्थी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। सुबूतों से छेड़छाड़ का मामला 20 जुलाई 2002 को पहली बार तब सामने आया था जब दिनेश चंद शर्मा के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। दिनेश को पहले निलंबित किया गया और फिर 25 जून 2004 को सेवाओं से बर्खास्त कर दिया गया था। अभियोजन पक्ष ने कहा कि बर्खास्तगी के बाद अंसल बंधुओं ने शर्मा को 15 हजार रुपये मासिक वेतन पर रोजगार दिलाने में भी मदद की थी।

इस मामले में आरोप पत्र दाखिल कर दिल्ली पुलिस ने माना था कि अंसल बंधुओं द्वारा सुुबूतों के साथ छेड़छाड़ करने से आपराधिक न्याय प्रणाली में आम आदमी का विश्वास कम हुआ है। उस समय शहर का सबसे संवेदनशील मामला था और ऐसे मामले में दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ को हल्के में नहीं लिया जा सकता था। पुलिस ने आरोप पत्र में कहा था कि छेड़छाड़ किए गए दस्तावेजों में घटना के तुरंत बाद बरामदगी का विवरण देने वाला एक पुलिस मेमो, उपहार के अंदर स्थापित ट्रांसफार्मर की मरम्मत से संबंधित दिल्ली फायर सर्विस रिकार्ड, प्रबंध निदेशक की बैठकों के मिनट और चार चेक शामिल थे।

अग्निकांड मामले में भी ठहराए गए थे दाेषी

उपहार सिनेमाघर में बार्डर फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान आग लगने से 59 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में सुशील और गोपाल अंसल को दोषी ठहराया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई थी, लेकिन उनके उम्र व जेल में बिताए गए समय को ध्यान में रखते 30-30 करोड़ रुपये बतौर जुर्माना देने की शर्त रिहा कर दिया था।

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