नई दिल्ली (नेमिष हेमंत)। पाकिस्तान परस्त आतंकियों के कारण सुलग रहे कश्मीर में अब पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) की दबी आवाज भी मुखर होगी। पिछले वर्ष 15 अगस्त पर लाल किला की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां रहने वाले कश्मीरियों पर अत्याचार का जिक्र किया था तो इस वर्ष अगस्त को घाटी में एक कार्यक्रम में वहां पाक सेना की बर्बरता का जिक्र करते हुए उस हिस्से को भारत में शामिल करने की मांग तेज की जाएगी।

खास बात कि पीओके की आवाज खुद कश्मीर में रहने वाले लोगों के साथ दिल्ली-एनसीआर में पढ़ने वाले कश्मीरी युवा और काम करते कश्मीरी उठाएंगे। इसके लिए राष्ट्रीय राजधानी से युवाओं का जत्था कश्मीर जाएगा।

कार्यक्रम की रूपरेखा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के करीबी संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के पदाधिकारियों की शनिवार को दिल्ली में हुई शीर्ष बैठक में तैयार की गई है। जिसके तहत पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को कश्मीर में तिरंगा लहराते हुए पाकिस्तान का झंडा भी फूंका जाएगा।

साथ ही पीओके की भावनाओं से देश की संवेदनाओं को जोड़ने के लिए उस दिन सभी राज्यों की राजधानी में भी विरोध कार्यक्रम आयोजित होंगे।

अभियान के बारे में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संगठन संयोजक गिरीश जुयाल ने बताया कि पीओके भारत का अभिन्न हिस्सा है, जिसे पाकिस्तान ने अपने कब्जे में कर लिया है।

आज भी जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 24 सीटें और विधान परिषद की छह सीटें रिक्त हैं जो पीओके का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने बताया कि अभियान का मकसद भटके कश्मीरी युवाओं को देश की मुख्य धारा से जोड़ने के साथ साथ उन्हें पाकिस्तान के असली चेहरे से परिचित कराना है।

अभियान में जम्मू-कश्मीर सरकार से पीओके के भूभाग के हिसाब से बजट का 30 फीसद उसके लिए आवंटित करने का दबाव भी बनाया जाएगा।

बता दें कि पीओके को लेकर मोदी सरकार की बदली नीति के तहत हाल ही में केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पीओके के निवासियों के लिए भारत का वीजा लेना आसान बनाया है। 

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