नई दिल्ली, प्रेट्र। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट में आइएनएक्स मीडिया मनी लांड्रिंग मामले में जमानत याचिका दायर की है। उनकी जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी। कांग्रेस नेता ने दिल्ली हाई कोर्ट के जमानत देने से इन्कार करने के आदेश को चुनौती दी है। कांग्रेस नेता के शीर्ष कोर्ट पहुंचने के कुछ देर बाद ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाई कोर्ट से 15 नवंबर के आदेश में 'दुर्घटनावश' हुई चूक दुरुस्त करने की मांग करते हुए अर्जी दायर की।

चूक को दुरुस्त करने का अनुरोध 

ईडी ने हाई कोर्ट में सोमवार को दायर अर्जी में 15 नवंबर को जस्टिस सुरेश कैट द्वारा दिए गए आदेश में दुर्घटनावश हुई चूक को दुरुस्त करने का अनुरोध किया है। ईडी की अर्जी के अनुसार, जस्टिस कैट ने अपने 15 नवंबर के आदेश में 2017 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली के वकील रोहित टंडन की जमानत ठुकराते हुए दिए गए आदेश के चार पैराग्राफ का उल्लेख किया है। टंडन को नोटबंदी संबंधी मनी लांड्रिंग मामले में 2016 में गिरफ्तार किया गया था।

याचिका को सूचीबद्ध करने का आदेश 

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बताया कि पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री चिदंबरम करीब 90 दिनों से जेल में हैं। उनकी जमानत याचिका पर शीघ्र सुनवाई की जाए। पीठ ने सिब्बल से कहा, 'हम देखेंगे।' बाद में पीठ ने बुधवार को उपयुक्त पीठ में सुनवाई के लिए याचिका सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने नहीं दी जमानत

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज आइएनएक्स मीडिया मनी लांड्रिंग मामले में चिदंबरम को जमानत देने से इन्कार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि उनके खिलाफ लगे आरोप पहली नजर में गंभीर प्रकृति के हैं और अपराध में उनकी सक्रिय एवं प्रमुख भूमिका रही है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चिदंबरम को जमानत देने से इन्कार करने के लिए दूसरे मामले के आदेश के तथ्य का उल्लेख केवल हवाला देने के लिए है।

मामले में अनियमितता का आरोप 

चिदंबरम को सबसे पहले सीबीआइ ने 21 अगस्त को आइएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया था और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 22 अक्टूबर को उन्हें जमानत दे दी थी। सीबीआइ ने 15 मई, 2017 को मामला दर्ज किया था जिसमें आइएनएक्स मीडिया समूह को 2007 में 305 करोड़ रुपये का विदेशी कोष हासिल करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआइपीबी) की मंजूरी देने में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। इस दौरान चिदंबरम वित्त मंत्री थे। इसके बाद ईडी ने भी इसी संबंध में 2017 में मनी लांड्रिंग का एक मामला दर्ज किया था।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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