नई दिल्ली [रणविजय सिंह]। देश भर में बन रहे नए एम्स का असर कहें या कुछ और लेकिन एक सच यह है कि दिल्ली एम्स में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की संख्या 12.41 फीसद कम हुई है। खासतौर पर मुख्य अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। एम्स की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार मुख्य ओपीडी में मरीजों की संख्या 20.68 फीसद तक कम हो गई है। दिलचस्प बात यह है कि मुख्य ओपीडी में वर्ष 2018-19 में पिछले सात सालों में मरीजों की संख्या सबसे कम रही। हालांकि, मुख्य अस्पताल सहित एम्स के सभी सेंटरों में मरीजों के दाखिले, सर्जरी व प्रोसिजर बढ़े हैं।

एम्स में मुख्य अस्पताल के अलावा आठ सेंटर व हरियाणा के झज्जर में आउटरीच ओपीडी व राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनसीआइ) है। 2483 बेड की क्षमता वाले एम्स के मुख्य अस्पताल की बेड क्षमता 1162 है। रिपोर्ट के अनुसार मुख्य अस्पताल की ओपीडी को छोड़कर संस्थान के अन्य प्रमुख सेंटरों में मरीजों की संख्या में थोड़ी बहुत बढ़ोतरी हुई है। जिसमें आरपी सेंटर, कार्डियक सेंटर, न्यूरो सेंटर, कैंसर सेंटर, ट्रॉमा सेंटर मुख्य रूप से शामिल हैं।

वर्ष 2018-19 में एम्स की ओपीडी में कुल 38 लाख 14 हजार 726 मरीजों का इलाज हुआ। जबकि वर्ष 2017-18 में यह आंकड़ा 43 लाख 55 हजार 338 थी। इस तरह वर्ष 2018-19 में मरीजों की संख्या 5,40,612 लाख कम हो गई। इसका कारण मुख्य अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या घटने के अलावा सीसीएम (सेंटर फॉर कम्यूनिट मेडिसिन) की सक्रियता कम होना है।

वहीं वर्ष 2017-18 में एम्स के मुख्य अस्पताल की ओपीडी में 20 लाख 88 हजार 171 मरीजों का इलाज हुआ था। इसके अगले साल यह संख्या 4 लाख 31 हजार 842 कम हो गई। इस तरह मुख्य अस्पताल की ओपीडी में कुल 16 लाख 56 हजार 329 मरीजों का इलाज हुआ।

इस मामले पर एम्स की अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। हालांकि इसका एक कारण यह बताया जा रहा है कि दिल्ली एम्स में मरीजों का दबाव कम करने के लिए छह शहरों में बने नए एम्स संचालित हो चुके हैं। इसके अलावा एम्स में अप्वाइंटमेंट सिस्टम लागू होने के बाद सभी विभागों में मरीजों की संख्या निर्धारित कर दी गई है। इसके मुताबिक ही प्रतिदिन मरीज देखे जाते हैं। इस बारे में एम्स की प्रवक्ता डॉ. आरती विज से बात करने की कोशिश की गई। उनके मोबाइल पर मैसेज भी भेजा गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।

रिपोर्ट के अनुसार दो लाख 54 हजार 605 मरीज भर्ती किए गए। वहीं, दो लाख एक हजार 793 मरीजों की सर्जरी व विभिन्न प्रोसिजर हुए। इसके अलावा मुख्य अस्पताल में संक्रमण दर छह फीसद से घटकर 5.8 फीसद रही। वहीं मृत्युदर (1.7) में भी थोड़ी कमी आई है, लेकिन कार्डियक और न्यूरो सेंटर में मृत्युदर 2.8 से बढ़कर 2.9 फीसद दर्ज की गई।

Posted By: Mangal Yadav

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