नई दिल्ली [राकेश कुमार सिंह]। Diwali Celebration in Delhi: ग्रीन पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों पर खरा उतर पाना दिल्ली ही नहीं, बल्कि देशभर के पटाखा कारोबारियों के लिए भी मुश्किल हो रहा है। दिल्ली-एनसीआर में 500 करोड़ से अधिक का यह कारोबार अब महज कुछ करोड़ तक सिमट कर रह गया है। दिल्ली पुलिस का लाइसेंसिंग विभाग जहां पहले हर साल दशहरा के बाद फुटकर कारोबारियों को अस्थायी लाइसेंस जारी करता था। ग्रीन पटाखा का मामला उठने पर दो सालों में किसी को भी लाइसेंस नहीं दिया। इस बार सभी 15 जिले के डीसीपी से कहा गया है कि वे खुद अपने-अपने जिले के कारोबारियों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशानिर्देश व लाइसेंसिग विभाग द्वारा तैयार किए गए पैमाना के मुताबिक जांच परखकर लाइसेंस जारी करें।

लाइसेंस के लिए आवेदन करने के लिए दिल्ली पुलिस ने 27 सितंबर से 30 सितंबर का समय निर्धारित किया था। पूरी दिल्ली से 97 कारोबारियों ने आवेदन किया जिन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए अग्निशमन विभाग के पास भेजा गया। इनमें से 87 कारोबारियों के आवेदन को मानदंड पूरा न कर पाने पर रद कर दिया गया। केवल 11 कारोबारियों को ही अस्थायी लाइसेंस जारी किया गया। जिनकी दुकान पक्की है, वे आगामी 24 दिनों व अस्थायी शेड वाले 15 दिनों में ग्रीन पटाखा बेच पाएंगे। इस बार भी पटाखा कारोबारियों के अधिकतर आवेदन को रद किए जाने से कारोबारियों में घोर मायूसी छा गई है।

सख्ती रहेगी बरकरार

प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए पटाखों की बिक्री पर दिल्ली पुलिस सख्त रुख अपनाएगी। कोर्ट का आदेश है कि दिल्ली में दीपावली की रात पटाखे केवल दो घंटे ही चलाए जाएं। पिछले साल दिल्ली में पटाखा छोड़ने के लिए 2500 स्थान तय किए गए थे। इस बार भी लाइसेंसिग विभाग ने एनडीएमसी, एमसीडी, दिल्ली केंट आदि सिविक एजेंसियों को पत्र लिखकर पूछा है कि क्या वे पटाखा छुड़ाने के लिए पिछले साल की तुलना में और अधिक जगह बढ़ाएंगे। इसका जवाब अभी नहीं मिला है। सभी जिले के डीसीपी से कहा गया है कि वे अपने-अपने जिले के सभी थानों के बीट अफसरों को स्थानीय लोगों को जागरूक करने को कहें कि लोग निर्धारित समय व निर्धारित जगहों पर ही ग्रीन पटाखा चलाएं। विज्ञापन के जरिये लोगों को केवल ग्रीन पटाखा चलाने के लिए जागरूक करने को कहा गया है।

सरकारी आदेश के खिलाफ जो कारोबारी प्रदूषण फैलाने वाला पटाखे बेचेंगे उनके खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पिछले साल 60 से अधिक लोगों को प्रदूषण फैलाने वाला पटाखा बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। प्रदूषण फैलाने वाला पटाखा खरीदने व छोड़ने वाले के खिलाफ भी पुलिस धारा 188 के तहत कार्रवाई करेगी।

लाइसेंसिंग विभाग में तैनात एडिशनल पुलिस कमिश्नर सुभाशीष चौधरी के मुताबिक, पूरी दिल्ली में मात्र 14 कारोबारियों को स्थानीय लाइसेंस दिया गया है जो 600 किलो तक पटाखा स्टॉक में रखकर बेच सकेंगे। पिछले साल दीपावली से दो सप्ताह पहले सुप्रीम कोर्ट से पेसो सत्यापित पटाखा बेचने के दिशा-निर्देश मिलने पर पुलिस को लगा था कि पेसो सत्यापित पटाखा कहीं न कहीं उपलब्ध हो जाएगा, लिहाजा लाइसेंस के लिए आवेदन करने के लिए विज्ञापन दिया था। 400 को लाइसेंस दिए गए लेकिन बाजार में ग्रीन पटाखा न होने पर बाद में सारे आवेदन रद कर दिए गए। 2016 में करीब 1000 कारोबारियों को दीवाली के समय 22 दिनों के लिए अस्थायी लाइसेंस दिए गए थे।

ग्रीन पटाखों से कम होगा प्रदूषण

ग्रीन पटाखे भी सामान्य पटाखों की तरह ही दिखते, जलते और आवाज करते हैं। बस इनसे प्रदूषण कम फैलता है। इनके जलाने से पहले वाले पटाखों की तुलना में प्रदूषण 40-50 फीसद कम फैलता है। अब देश में किसी भी ऐसे पटाखे का निर्माण नहीं होगा जो ग्रीन नहीं है। ग्रीन पटाखे राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) की खोज है। नीरी ने पिछले पिछले साल जनवरी में तत्कालीन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री के बयान के बाद शोध शुरू किया था जिसमें उन्होंने इसकी जरूरत की बात कही थी। नीरी का कहना था कि ग्रीन पटाखे से जो हानिकारक गैसें निकलेगी, वे 40-50 फीसद कम निकलेंगी। ऐसा भी नहीं कि इससे प्रदूषण बिल्कुल भी नहीं होगा। सामान्य पटाखों के जलाने से भारी मात्र में नाइट्रोजन और सल्फर गैस निकलती है लेकिन ग्रीन पटाखे में कम गैस निकलेगी। नीरी ने इस तरह के फॉमर्ूेले तैयार किए हैं, जिनके बने पटाखे जलने के बाद पानी बनेगा और हानिकारक गैस उसमें घुल जाएंगी।

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Posted By: JP Yadav

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