जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के चारों दोषियों ने फांसी पर रोक लगवाने के लिए अर्जी दायर की है। पटियाला हाउस अदालत में दायर अर्जी में एक दोषी की दूसरी दया याचिका और अन्य दोषियों की अलग-अलग विचाराधीन याचिकाओं का हवाला दिया गया है। साथ ही कोरोना वायरस से फैली महामारी का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह समय फांसी के लिए सही नहीं है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने तिहाड़ जेल प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। गुरुवार को इस अर्जी पर सुनवाई होगी। दोषियों को 20 मार्च की सुबह साढ़े पांच बजे फांसी देने के लिए डेथ वारंट जारी किया गया है। अधिवक्ता एपी ¨सह की तरफ से दायर अर्जी में कहा गया है कि अक्षय ¨सह ने दूसरी दया याचिका दायर की है। जबकि पवन गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में निचली अदालत के उस फैसले के खिलाफ क्यूरेटिव याचिका दायर की है, जिसमें वारदात के समय उसे नाबालिग मानने से इन्कार कर दिया गया है। इसके अलावा दोषियों ने इंटरनेशल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भी याचिका दायर की हुई है। वहीं अक्षय ¨सह की पत्नी ने बिहार के औरंगाबाद की अदालत में तलाक की अर्जी दायर की हुई है। इसके अलावा पवन की एक याचिका हाई कोर्ट और चुनाव आयोग में विचाराधीन है। इसलिए जब तक सभी याचिकाओं पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक फांसी नहीं दे सकते। बॉक्स मुकेश ने हाई कोर्ट में भी दी चुनौती दोषी मुकेश ¨सह ने बुधवार को हाई कोर्ट में भी एक चुनौती याचिका दायर की है। जिसमें मंगलवार को निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई है। मुकेश ने अर्जी में कहा था कि 16 दिसंबर 2012 को सामूहिक दुष्कर्म और हत्या का अपराध हुआ था उस समय वह दिल्ली में था ही नहीं। पुलिस उसे 17 दिसंबर को राजस्थान से लाई और गलत फंसा दिया। लिहाजा उसे जो फांसी की सजा हुई है, उसे खारिज किया जाए। निचली अदालत ने इस अर्जी को खारिज कर दिया था। अब बुधवार को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई तो न्यायमूर्ति बृजेश सेठी ने याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया और देर शाम अर्जी को खारिज कर दिया। साथ ही कहा कि निचली अदालत के फैसले के अदालत में कोई कमी नहीं है।

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