नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। Odd Even in Delhi:  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार से ऑड-इवेन व्यवस्था लागू हो गई है। आज सम (इवेन) संख्या वाली गाड़ियां चलेंगी। यह व्यवस्था 15 नवंबर तक सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक यह व्यवस्था लागू रहेगी। इसके लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। अतिरिक्त बसों के इंतजाम के साथ मेट्रो के फेरे भी बढ़ाए गए हैं।

उधर, दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ऑड इवेन का जायजा लेने सड़कों पर निकले और लोगों से नियम पालन करने की अपील की।

जानिए कब चलेगी सम और कब चलेगी विषम संख्‍या वाली गाड़ी

योजना के तहत सम (इवेन) संख्या वाली तारीख 4, 6, 8, 12 और 14 नवंबर को सम रजिस्ट्रेशन नंबर (0, 2, 4, 6, 8) वाली गाडि़यां चलेंगी और विषम (ऑड) तारीख 5, 7, 9, 11, 13 और 15 नवंबर को विषम (1, 3, 5, 7 और 9) नंबर वाली गाडि़यां चलेंगी। दूसरे राज्यों वाले वाहनों पर भी ये नियम लागू होंगे और उल्लंघन करने पर 4,000 रुपये जुर्माना लगेगा।

केजरीवाल ने लोगों से कहा 'करें कार की पूलिंग'

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्री योजना को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। मुख्यमंत्री ने लोगों को कार पूलिंग का सुझाव दिया है। उनके मंत्री भी ऐसा करेंगे।

तीसरी बार लागू होगी व्यवस्था

दिल्ली में तीसरी बार यह व्यवस्था लागू होगी। इससे पहले जनवरी और अप्रैल 2016 में दो बार इसे लागू किया गया था। दावा है कि इससे 15 फीसद प्रदूषण कम हुआ था।

विश्व के विभिन्न शहरों में रहा ऑड-इवेन का प्रभाव

बीजिंग: बीजिंग में इस स्कीम को 2008 ओलंपिक से पहले लागू किया गया था। इससे प्रदूषण में 40 फीसद तक की कमी आई थी। हालांकि इस दौरान वहां रोड पॉलिसी में कई बदलाव भी किए गए थे। नियम तोड़ने पर 200 युआन का जुर्माना था।

पेरिस: फ्रांस की राजधानी पेरिस में इस योजना को 2014 के मार्च में महज एक दिन के लिए लागू किया गया था। वर्ष 1997 में भी इसे एक दिन के लिए लागू किया गया था। वहां जुर्माने की राशि 22 यूरो थी।

मैक्सिको सिटी: मैक्सिको में इसे वर्ष 1989 में लागू किया गया था। प्रदूषण के स्तर में 11 फीसद तक की कमी देखी गई, लेकिन लोगों ने भी इसका काट खोज निकाला और दो कारें खरीद लीं। इससे बाद में प्रदूषण के स्तर में 13 फसीद बढ़त पाई गई।

बोगोटा: कोलंबिया की राजधानी बोगोटा में इस स्कीम को पिको-प्लाका नाम दिया गया था। इसके तहत वे हर सप्ताह में दो दिनों तक दो घंटे के लिए कारें बैन कर देते थे। हालांकि इस स्कीम से प्रदूषण में कोई खास फायदा नहीं देखा गया। इसके तहत अलग-अलग जगह पर मानक तय किए गए हैं।

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Posted By: Prateek Kumar

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