नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। नये आइटी निमयों को चुनौती देने वाली एक अधिवक्ता की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायमूर्ति डीएन पटेल व न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 13 सितंबर तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी। इसी तारीख पर आइटी नियमों से जुड़ी अन्य याचिकाओं पर सुनवाई होनी है।

नए कानून को निरस्त करने की मांग

अधविक्ता उदय बेदी ने याचिका दायर कर नये आइटी (मध्यस्थों और डिजिटल मीडिया आचार संहिता के लिए दिशानिर्देश) नियम-2021 की धारा तीन व चार को निजता व अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन बताया। साथ ही इसे निरस्त करने की मांंग की है।

लिखने वाले का पक्ष सुने बगैर कंटेंट हटाने का अधिकार मौलिक अधिकार की अवहेलना

उन्होंने कहा कि नए आइटी नियम की धारा-तीन वाट्सएप, इंस्टाग्राम, ट्विटर जैसे बिचौलिये मीडिया प्लेटफार्म को किसी शिकायत के आधार पर कंटेंट्स को हटाने का अधिकार देता है। उन्होंने दलील दी कि लिखने वाले का पक्ष सुने बगैर कंटेेंट को हटाने का अधिकार देने वाला यह नियम मौलिक अधिकार की अवहेलना है और निजता के अधिकार का हनन है।

नए नियम में कुछ बातें स्पष्ट नहीं

उन्होंने कहा कि नये नियम में भी यह भी स्पष्ट नहीं है कि शिकायत सुनने वाले अधिकारी की नियुक्ति कैसे होगी और उसके अधिकार क्या होंगे। वहीं, आइटी नियम की धारा-चार के तहत अगर कोई कंटेंट हटाया जाता है तो कंटेंट लिखने वाले व्यक्ति की अभिव्यक्ति की आजादी व उसके निजता के अधिकार का हनन होता है। यह संविधान में दिए गए अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का हनन है। नये आइटी नियम-2021 को इससे पहले समाचार पोर्टल द-वायर, द-क्विंट, आल्टन्यूज और प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया ने भी चुनौती दी है।

 

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