नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाने के करीब आधे घंटे में जेल के चिकित्सक फांसी घर में प्लेटफार्म के नीचे कोठरी में दाखिल हुए तो उन्होंने जांच करके मौत की पुष्टि की। मैनुअल के मुताबिक फांसी के तय समय के करीब दो घंटे बाद इनके शव को नीचे उतारा गया और पोस्टमार्टम के लिए डीडीयू अस्पताल भेजा गया, जहां चिकित्सकों के पांच सदस्यीय पैनल चारों शव का पोस्टमार्टम किया।

डीडीयू अस्पताल में फोरेंसिक विभाग के अध्यक्ष डॉ बीएन मिश्रा की अध्यक्षता में गठित पैनल को सभी शव का पोस्टमार्टम करने में करीब चार घंटे का वक्त लगा। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए।

मोर्चरी में ज्यूडिशियल हैंगिंग का पहला मामला

डीडीयू अस्पताल की मोर्चरी में ज्यूडिशियल हैंगिंग का यह पहला मामला था। जैसे ही तिहाड़ से शुक्रवार को शव मोर्चरी में लाए गए, चिकित्सकों की टीम तत्काल कार्य में जुट गई। इस बीच दोषियों के परिजन भी शव की पहचान के लिए पहुंच चुके थे। दोषियों में अक्षय की पत्नी यहां पहुंची थी। वहीं अन्य दोषियों में किसी के पिता तो किसी के भाई शव की पहचान के लिए पहुंचे थे।

वीडियोग्राफी भी कराई गई

इसके बाद बारी-बारी से शव के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पोस्टमार्टम के दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई। शनिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार होने की उम्मीद है। इससे पहले वर्ष 2013 में निर्भया मामले के आरोपित राम सिंह का शव भी यहां लाया गया था। लेकिन, तब मामला खुदकशी का था। हालांकि, राम सिंह मामले में भी शव का पोस्टमार्टम यहां नहीं हुआ था।

शुुक्रवार सुबह 5.30 बजे दी गई थी फांसी

बता दें कि निर्भया के चारों दोषियों को तिहाड़ जेल में शुक्रवार सुबह 5.30 बजे फांसी दी गई। सभी को एक साथ फांसी देने के साथ ही निर्भया को सात साल के बाद न्याय मिल गया। फांसी देने के बाद मामले की जानकारी तिहाड़ जेल प्रशासन ने कोर्ट को भी दी है। 

Posted By: Mangal Yadav

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